एमआरएफ केंद्र के पास 105 मीटर सडक़ निर्माण
पर्यावरण संरक्षण के साथ टिकाऊ समाधान
पुत्तूर (दक्षिण कन्नड़). प्लास्टिक कचरे के प्रभावी पुन: उपयोग की दिशा में एक अभिनव पहल करते हुए पुत्तूर तालुक के केदंबाड़ी ग्राम पंचायत क्षेत्र में प्लास्टिक मिश्रित डामर सडक़ का निर्माण किया गया है। यह सडक़ तिंगलाडी के समीप बोल्लोडी स्थित समग्र घन कचरा प्रबंधन केंद्र (एमआरएफ) तक पहुंच मार्ग के रूप में विकसित की गई है।
करीब 15 लाख रुपए की लागत से बनी यह सडक़ 105 मीटर लंबी और 5.5 मीटर चौड़ी है। इसकी विशेषता यह है कि डामर (बिटुमिन) में लगभग 8 प्रतिशत प्रसंस्कृत प्लास्टिक मिलाकर निर्माण किया गया है। विशेषज्ञों के अनुसार, ऐसी सडक़ें सामान्य सडक़ों की तुलना में अधिक टिकाऊ होती हैं और बारिश व भारी वाहनों के दबाव को बेहतर तरीके से सहन कर सकती हैं।
बोल्लोडी एमआरएफ केंद्र पुत्तूर, कडबा और सुल्या तालुकों के ग्राम पंचायतों से एकत्रित सूखे कचरे के प्रबंधन का प्रमुख केंद्र है, जहां प्रतिदिन लगभग 7 टन कचरे का पुनर्चक्रण किया जाता है। यहां प्लास्टिक को अलग कर मशीनों के माध्यम से बंडल बनाकर पुन: उपयोग के लिए तैयार किया जाता है।
इस बार उसी प्लास्टिक कचरे का उपयोग सडक़ निर्माण में किया गया, जो कचरा प्रबंधन के क्षेत्र में एक नया मॉडल बनकर उभरा है। इससे न केवल प्लास्टिक निस्तारण की समस्या का समाधान मिल रहा है, बल्कि सडक़ निर्माण की लागत में भी कमी आ रही है।
अधिकारियों के अनुसार, इस तकनीक से लगभग 10 प्रतिशत बिटुमिन की बचत होती है और सडक़ अधिक जलरोधी बनती है। यह पहल भविष्य में पर्यावरण संरक्षण और टिकाऊ विकास के लिए एक प्रभावी उदाहरण साबित हो सकती है।

