कांग्रेस की मुश्किलें बढ़ीं
नामांकन वापसी की समयसीमा बीती
मनाने पहुंचे नेता लौटे खाली हाथ
दावणगेरे. दक्षिण विधानसभा उपचुनाव में कांग्रेस को बड़ा झटका लगा है। पार्टी के बागी उम्मीदवार सादिक पहलवान को मनाने की कोशिशें गुरुवार को विफल हो गईं। केपीसीसी कार्याध्यक्ष सलीम अहमद और विधायक रिजवान अरशद के नेतृत्व में पहुंचा कांग्रेस प्रतिनिधिमंडल लंबी चर्चा के बावजूद उन्हें नामांकन वापस लेने के लिए राजी नहीं कर सका।
नामांकन वापसी की अंतिम समयसीमा दोपहर 3 बजे समाप्त हो गई, जबकि बैठक दोपहर तक जारी रही। इस दौरान पहलवान के समर्थकों ने प्रतिनिधिमंडल के खिलाफ ‘गो बैक’ के नारे लगाकर विरोध जताया और अपने नेता पर चुनाव से पीछे न हटने का दबाव बनाया।
हालांकि नेताओं ने पहलवान को अलग ले जाकर बंद कमरे में बातचीत की, लेकिन समयसीमा समाप्त होने के बाद प्रतिनिधिमंडल को खाली हाथ लौटना पड़ा। बाहर आकर नेताओं ने कहा कि समय कम होने के कारण नामांकन वापसी संभव नहीं हो सकी, लेकिन पहलवान अब भी “पार्टी के साथ” हैं और आगे समाधान तलाशा जाएगा।
विधायक रिजवान अरशद ने कहा कि सादिक पहलवान कांग्रेस परिवार का हिस्सा हैं। कुछ मुद्दों पर उनकी नाराजगी है। समयाभाव के कारण नामांकन वापस नहीं हो सका, लेकिन हम उन्हें और उनके समर्थकों को विश्वास में लेंगे।
वहीं, केपीसीसी कार्याध्यक्ष सलीम अहमद ने कहा कि टिकट न मिलने पर ऐसी नाराजगी स्वाभाविक है। हम उनसे बात कर चुके हैं और आगे भी संवाद जारी रहेगा। हमें विश्वास है कि वह पार्टी के लिए ताकत साबित होंगे।
दूसरी ओर, सादिक पहलवान ने स्पष्ट शब्दों में कहा है कि वह किसी भी स्थिति में चुनाव मैदान से पीछे नहीं हटेंगे। “अगर मैं पीछे हटा तो समाज पीछे हटेगा। मैं चुनाव जरूर लड़ूंगा।
इस घटनाक्रम ने दावणगेरे दक्षिण क्षेत्र में राजनीतिक समीकरणों को जटिल बना दिया है। खासकर अल्पसंख्यक मतों के बंटवारे की आशंका से कांग्रेस की चिंता बढ़ गई है। उल्लेखनीय है कि 11 अन्य उम्मीदवारों ने अपने नामांकन वापस ले लिए हैं, लेकिन पैलवान के डटे रहने से मुकाबला दिलचस्प और चुनौतीपूर्ण बन गया है।
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