दिव्यांगों के चेहरे पर मुस्कान, 30 साल की सेवा का असरमहावीर लिंब सेंटर के 30वें स्थापना दिवस समारोह में दिव्यांगों को कृत्रिम हाथ, पैर लगाए गए।

दिव्यांगों के चेहरे पर मुस्कान, 30 साल की सेवा का असर

दान से ही सच्चा संतोष, लोभ सबसे बड़ा शत्रु

आचार्य विमलसागर सूरीश्वर ने कहा

हुब्बल्ली. शहर के संस्कार स्कूल प्रांगण में महावीर लिंब सेंटर का 30वां स्थापना दिवस समारोह श्रद्धा और सेवा भाव के साथ मनाया गया। इस अवसर पर बड़ी संख्या में दिव्यांगजनों को कृत्रिम हाथ-पैर प्रदान कर उन्हें आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल की गई।

दान से मिलता है परम संतोष: आचार्य

समारोह में मार्गदर्शन देते हुए आचार्य विमलसागर सूरीश्वर ने कहा कि धन की कोई सीमा नहीं होती, लेकिन दान से मिलने वाला संतोष सबसे बड़ा होता है। दया, करुणा, भक्ति और सेवा जैसे गुणों से ही दान की भावना उत्पन्न होती है।

उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि जैसे सूर्य, पेड़-पौधे और प्रकृति निरंतर देते रहते हैं, वैसे ही मनुष्य को भी समाज के प्रति अपने कर्तव्यों का पालन करना चाहिए। सामथ्र्य होते हुए भी दान न करना सामाजिक अन्याय के समान है।

दो प्रकार के गरीब

आचार्य ने कहा कि दुनिया में दो प्रकार के गरीब होते हैं—एक वे जो अभाव के कारण गरीब हैं और दूसरे वे, जिनके पास सब कुछ होते हुए भी उदारता का अभाव है। उन्होंने स्वभावगत गरीबी को अधिक खतरनाक बताते हुए इसे समय रहते दूर करने की आवश्यकता बताई।

लोभ को सबसे बड़ा शत्रु बताते हुए उन्होंने कहा कि यह व्यक्ति के लाभ को भी नष्ट कर देता है और जीवन को अशांत बना देता है।

मुख्य अतिथि ने सराहा सेवा कार्य

कार्यक्रम के मुख्य अतिथि, बेलगावी सांसद एवं पूर्व मुख्यमंत्री जगदीश शेट्टर ने जैन समाज की उदारता, पवित्रता और सेवा भावना की सराहना की। उन्होंने कहा कि जैन समाज की जीवनशैली उन्हें हमेशा प्रेरित करती है।

इस दौरान उन्होंने आचार्य से आशीर्वाद प्राप्त किया और संस्था के 30 वर्षों के सेवा कार्यों की भूरी-भूरी प्रशंसा की।

60 हजार से अधिक लोगों को मिला लाभ

लिंब सेंटर के अध्यक्ष गौतम गुलेच्छा ने कहा कि महावीर लिंब सेंटर ने अब तक 350 शिविर आयोजित कर 60 हजार से अधिक दिव्यांगजनों को कृत्रिम अंग प्रदान कर उन्हें सशक्त बनाया है।

कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए संस्थापक अध्यक्ष महेंद्र एच. सिंघी ने कहा कि संस्था का मूल उद्देश्य जरूरतमंद दिव्यांगजनों को आत्मनिर्भर बनाना है। उन्होंने 30 वर्षों की सेवा यात्रा का उल्लेख करते हुए बताया कि यह कार्य समाज के सहयोग और विश्वास से ही संभव हो पाया है।
विधायक एवं स्लम बोर्ड के चेयरमैन प्रसाद अब्बय्या ने कहा कि महावीर लिंब सेंटर का कार्य समाज के लिए प्रेरणादायक है। दिव्यांगजनों को नई जिंदगी देने का यह प्रयास वास्तव में मानवता की सच्ची सेवा है।

विधान परिषद सदस्य एफ.एच. जक्कप्पनवर ने भी संस्था के कार्यों की सराहना करते हुए कहा कि ऐसी संस्थाएं समाज में सकारात्मक बदलाव लाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। सरकार भी ऐसे प्रयासों को हर संभव सहयोग देने के लिए प्रतिबद्ध है।

विशिष्ट अतिथियों ने जताया गौरव

जैन मरुधर संघ के पूर्व अध्यक्ष पुखराज संघवी और अध्यक्ष जयंतीलाल परमार ने संस्था के निरंतर सेवा कार्यों की प्रशंसा की। स्थानकवासी समाज के अध्यक्ष उकचंद बाफना तथा तेरापंथ सभा के अध्यक्ष पारसमल भंसाली ने कहा कि समाज के सहयोग से ही ऐसे सेवा कार्य आगे बढ़ते हैं।

उद्यमी विजय शेट्टर ने भी इस पहल को सराहनीय बताते हुए इसे सामाजिक उत्तरदायित्व का उत्कृष्ट उदाहरण बताया।

सेवा में सहयोग और सम्मान

इस अवसर पर श्री नाकोड़ा तीर्थ, मेवानगर की ओर से दिव्यांग सेवा के लिए आर्थिक सहयोग का चेक सेंटर को सौंपा गया। साथ ही स्वर्गीय पारसमल बागरेचा की स्मृति में निर्मलादेवी बागरेचा एवं अनिल बागरेचा द्वारा एक दुपहिया वाहन संस्था को भेंट किया गया, जो सेवा कार्यों में सहायक सिद्ध होगा।

कार्यक्रम में वासुपूज्य महिला मंडल द्वारा संतजनों का स्वागत किया गया और श्रद्धालुओं ने उदारतापूर्वक दान देकर सेवा कार्यों में योगदान दिया।

सेवा और मानवता का संदेश

यह आयोजन न केवल सेवा का उदाहरण बना, बल्कि समाज में दान, करुणा और मानवता के मूल्यों को सुदृढ़ करने का संदेश भी दे गया।

कार्यक्रम में लिंब सेंटर के सचिव प्रकाश कटारिया, उपाध्यक्ष अशोक कोठारी, कोषाध्यक्ष मानव संघवी, सह सचिव महावीर कुंदूर, गौतम बाफना, भरत पालगोता, कांतिलाल बोहरा, महेंद्र जैन, राजेश बोहरा, सुनील भूरट, सुधीर वोरा, उज्वल सिंघी सहित अनेक गणमान्य उपस्थित थे। कार्यक्रम के चेयरमैन सुभाष डंक ने आयोजन को सफल बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

कार्यक्रम का संचालन प्रकाश कटारिया ने किया तथा अशोक कोठारी ने आभार व्यक्त किया। अंत में फेडरेशन के दिवंगत सदस्य प्रकाश चोरडिया को श्रद्धांजलि अर्पित की गई और राष्ट्रगान के साथ कार्यक्रम का समापन हुआ।

 

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