चैत्र पूर्णिमा मोक्ष कल्याण की पावन तिथि
चैत्री पूर्णिमा का आध्यात्मिक महत्व बताया
दावणगेरे. शहर के काईपेट स्थित शंखेश्वर पाश्र्व राजेन्द्र गुरुमंदिर संघ में विराजित साध्वी भव्यगुणा ने चैत्र पूर्णिमा के पावन अवसर पर धर्मसभा को संबोधित करते हुए इस दिन की विशेष महिमा का वर्णन किया।
उन्होंने कहा कि सिद्धाचल गिरिराज पर आदिनाथ भगवान के प्रथम गणधर पुण्डरिक स्वामी ने अनादिकाल से चले आ रहे आठों कर्मों का क्षय कर इसी दिन मोक्ष प्राप्त किया था। इसी कारण यह तीर्थ “श्री पुण्डरिक गिरि” के नाम से प्रसिद्ध हुआ।
एक यात्रा का फल अनेक तीर्थों के समान
साध्वी ने कहा कि संसार के विभिन्न तीर्थों की यात्रा से जो पुण्य प्राप्त होता है, वही फल पुण्डरिक तीर्थाधिराज की एक यात्रा से प्राप्त हो जाता है।
उन्होंने श्रद्धालुओं से आह्वान किया कि चैत्र पूर्णिमा के दिन सिद्धाचल तीर्थ पर या उसके प्रतीक स्वरूप स्थापना कर श्रद्धा और भक्ति से आराधना करनी चाहिए।
उपवास, पूजा और साधना का विशेष महत्व
साध्वी ने कहा कि इस दिन उपवास, जिनालय में स्नात्र पूजा, दान, शील पालन और स्वास्तिक पूजन का विशेष महत्व है।
भक्त यदि पंच शक्रस्तव सहित देववंदन, लोगस्स काउसग्ग, ध्यान और प्रभावना करते हैं, तो वे नरक और तिर्यंच गति से मुक्ति पाकर मोक्ष मार्ग की ओर अग्रसर होते हैं।
साथ ही मंत्रोच्चार से पवित्र स्नात्र जल का छिडक़ाव करने से घर में आने वाले संकट, रोग और उपद्रव भी शांत होते हैं तथा सुख-समृद्धि की प्राप्ति होती है।
कार्यक्रम में स्थानीय जनप्रतिनिधि और समाजसेवी शामिल थे। शंखेश्वर पाश्र्व राजेन्द्र गुरुमंदिर संघ की ओर से सभी अतिथियों का स्वागत और अभिनंदन किया गया।
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