नरगुंद में धारीदार लकड़बग्घे ने दिए दो शावकों को जन्मनरगुंद में धारीदार लकड़बग्घे ने दिए दो शावकों को जन्म।

दुर्लभ प्रजाति के संरक्षण पर जोर

वन विभाग ने बढ़ाई निगरानी और जागरूकता

नरगुंद (गदग). गदग जिले के नरगुंद तालुक के कल्लापुर गांव में धारीदार लकड़बग्घे (स्ट्राइप्ड हाइना) ने हाल ही में दो शावकों को जन्म दिया है। यह घटना लगभग 8-10 दिन पहले की बताई जा रही है, जिससे क्षेत्र में वन्यजीव संरक्षण को लेकर नई चर्चा शुरू हो गई है।

स्थानीय किसान आनंद हलेहोली समेत अन्य ग्रामीणों ने इस दुर्लभ घटना की जानकारी वन विभाग के अधिकारियों और जैवविविधता शोधकर्ता मंजुनाथ एस. नायक को दी। इसके बाद विभागीय टीम ने गांव के आसपास के खेतों में सर्वेक्षण कर स्थिति का जायजा लिया और लोगों को जागरूक किया। फिलहाल, मादा हाइना अपने शावकों के साथ कुलगेरी वन क्षेत्र की ओर चली गई है।

विशेषज्ञों मंजुनाथ एस नायक के अनुसार, धारीदार लकड़बग्घे को अक्सर गलत समझा जाता है। यह मुख्य रूप से मृत और सड़े-गले जानवरों का मांस खाकर पर्यावरण को स्वच्छ रखने में अहम भूमिका निभाता है। हालांकि, यह कभी-कभी छोटे पशुओं का शिकार भी करता है। गर्मियों में यह फल भी खाता है। स्वभाव से बेहद शर्मीला यह जानवर मनुष्यों से दूर रहना पसंद करता है।

वन विभाग के डिप्टी कंजर्वेटर ऑफ फॉरेस्ट (डीसीएफ) संतोषकुमार केंचप्पनवर ने बताया कि जिले में इस प्रजाति के संरक्षण के लिए लगातार जागरूकता कार्यक्रम चलाए जा रहे हैं। लोगों को डरने की जरूरत नहीं है, विभाग हर समय सहयोग के लिए तैयार है और मानव-वन्यजीव संघर्ष रोकने के लिए आवश्यक कदम उठाए जा रहे हैं।

उल्लेखनीय है कि आवास नष्ट होने के कारण भारत में धारीदार लकड़बग्घों की संख्या घट रही है। यह वन्यजीव संरक्षण अधिनियम-1972 के तहत संरक्षित प्रजाति है और इसका शिकार दंडनीय अपराध है।

Spread the love

By Bharat Ki Awaz

मैं भारत की आवाज़ हिंदी न्यूज़ पोर्टल से जुड़ा हुआ हूँ, जहाँ मेरा उद्देश्य पाठकों तक सटीक, निष्पक्ष और ताज़ा ख़बरें पहुँचाना है। राजनीति, समाज, संस्कृति और स्थानीय मुद्दों पर गहरी रुचि रखते हुए मैं हमेशा कोशिश करता हूँ कि समाचार केवल सूचना न हों, बल्कि पाठकों को सोचने और समझने का अवसर भी दें। मेरी लेखनी का मक़सद है—जनता की आवाज़ को मंच देना और देश-समाज से जुड़े हर पहलू को ईमानदारी से प्रस्तुत करना। भारत की आवाज़ के माध्यम से मैं चाहता हूँ कि पाठक न केवल ख़बरें पढ़ें, बल्कि उनसे जुड़ाव महसूस करें।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *