पुराने इंजन से बिगड़ी हवासांदर्भिक फोटो।

जिले में फिटनेस नवीनीकरण के बिना सडक़ों पर दौड़ रहे हजारों वाहन

मेंगलुरु. केंद्रीय सरकार की ओर से प्रदूषण कम करने के उद्देश्य से लागू की गई गुजरी (वाहन स्क्रैपिंग) नीति का पालन मेंगलूरु जिले में गंभीरता से नहीं हो रहा है। परिणामस्वरूप हजारों पुराने वाहन अब भी सडक़ों पर सक्रिय हैं और वायु प्रदूषण बढ़ा रहे हैं।

जिले में हजारों वाहन बिना फिटनेस नवीनीकरण

सार्वजनिक परिवहन विभाग के आंकड़ों के अनुसार 6,617 दोपहिया और 5,767 कारें बिना फिटनेस नवीनीकरण के चल रही हैं। इनमें से कुछ वाहन सडक़ पर सक्रिय नहीं हैं, लेकिन उनका स्क्रैपिंग में भेजा जाना सुनिश्चित नहीं है।

गुजरी नीति के मुख्य प्रावधान

डीजल वाहन: 15 साल बाद फिटनेस टेस्ट अनिवार्य।
पेट्रोल वाहन: 20 साल बाद फिटनेस टेस्ट जरूरी।
फिटनेस टेस्ट में पास होने पर ही वाहन सडक़ पर चल सकता है, अन्यथा स्क्रैपिंग में भेजना अनिवार्य।

सरकारी वाहनों ने नियमों का पालन किया

जिले में कई विभागों के पुराने वाहन अधिकृत रूप से गुजरी में भेजे गए हैं।

स्वास्थ्य विभाग – 19 वाहन
मछलीपालन विभाग – 1 वाहन
जिलाधिकारी कार्यालय – 1 वाहन
आबकारी विभाग – 3 वाहन
खनन व भूविज्ञान विभाग – 2 वाहन
पशुपालन विभाग – 2 वाहन
ग्रामीण सडक़ विकास संस्था – 1 वाहन

गुजरी प्रक्रिया

15 साल पुराने वाहन का आरटीओ में पंजीकरण रद्द।
वाहन को पर्यावरण-अनुकूल तरीके से स्क्रैप किया जाता है।
वाहन मालिक को जमा प्रमाणपत्र दिया जाता है।
स्क्रैपिंग के बाद वाहन स्क्रैपिंग प्रमाणपत्र जारी होता है।
राज्य में बेंगलूरु (देवनहल्ली) और तुमकुर (कोरटगेरे) में अधिकृत केंद्र कार्यरत हैं।

विशेषज्ञों का कहना है कि नीति का पालन न होने से जिले में वायु प्रदूषण बढ़ रहा है। पुराने वाहन बिना फिटनेस टेस्ट सडक़ों पर सक्रिय हैं, जिससे स्वास्थ्य और पर्यावरण दोनों प्रभावित हो रहे हैं।
अधिकारियों का मानना है कि वाहन मालिकों को जागरूक करना और नियमित फिटनेस टेस्ट कराना अनिवार्य है।

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By Bharat Ki Awaz

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