सरकारी मेडिकल कॉलेज और जिला अस्पताल के लिए ठोस घोषणा की आस
उडुपी. वित्त वर्ष 2025-26 के केंद्रीय और राज्य बजट के नजदीक आते ही उडुपी जिले के लोगों में एक बार फिर नई उम्मीदें जगी हैं। वर्षों से लंबित योजनाओं और अधूरी मांगों के बीच अब जिले की नजरें बजट पर टिकी हैं।
सरकारी मेडिकल कॉलेज की मांग बरकरार
उडुपी में सरकारी मेडिकल कॉलेज की स्थापना लंबे समय से प्रमुख मांग रही है।
पिछले वर्ष सोशल मीडिया अभियान भी चला, लेकिन ठोस परिणाम नहीं निकला।
हाल ही में पुत्तूर में नए मेडिकल कॉलेज की घोषणा के बाद उडुपी में संभावना कमजोर पडऩे की आशंका।
कॉलेज बनने से गरीब और मध्यम वर्ग के छात्रों को कम खर्च में शिक्षा और बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं मिलेंगी।
नीट में सफलता, फिर भी बाहर जाना मजबूरी
स्थानीय नागरिकों का कहना है कि कई छात्र नीट परीक्षा में अच्छे अंक प्राप्त करने के बावजूद सरकारी कॉलेज न होने से अन्य जिलों या राज्यों में पढ़ाई करने को मजबूर हैं। कॉलेज होने से छात्रों और स्वास्थ्य सेवाओं दोनों को लाभ होगा।
जिला अस्पताल का निर्माण कार्य धीमा
नए जिला अस्पताल का सिविल कार्य लगभग पूरा, लेकिन पार्किंग और अन्य सुविधाएं अधूरी।
नागरिकों की मांग है कि बजट में पर्याप्त अनुदान देकर निर्माण कार्य शीघ्र पूरा किया जाए।
जनप्रतिनिधियों की भूमिका पर सवाल
एमजीएम कॉलेज के राज्यशास्त्र विभाग के सेवानिवृत्त प्रमुख कोक्कर्णे सुरेंद्रनाथ शेट्टी ने कहा कि जनप्रतिनिधियों ने मेडिकल कॉलेज की मांग को मजबूती से आगे नहीं बढ़ाया। उन्होंने जोर दिया कि पुत्तूर की तरह उडुपी में भी कॉलेज की स्थापना होनी चाहिए।
अब देखना यह है कि आगामी बजट में उडुपी को सरकारी मेडिकल कॉलेज और स्वास्थ्य अधोसंरचना के क्षेत्र में कोई ठोस सौगात मिलती है या उम्मीदें एक बार फिर अधूरी रह जाती हैं।

