जनसंख्या के अनुपात में अनुसूचित जाति-जनजाति आरक्षण बढ़ाने को केंद्र पर दबाव डालेगी सरकार
मुख्यमंत्री सिद्धरामय्या ने कहा
हरिहर (दावणगेरे). मुख्यमंत्री सिद्धरामय्या ने कहा कि इतिहास को जाने बिना भविष्य का निर्माण असंभव है। उन्होंने स्पष्ट किया कि सरकार सामाजिक न्याय के प्रति प्रतिबद्ध है और जनसंख्या के अनुपात में अनुसूचित जाति व अनुसूचित जनजाति के लिए आरक्षण बढ़ाने के मुद्दे पर केंद्र सरकार पर दबाव डालेगी।
वे राजनहल्ली स्थित महर्षि वाल्मीकि गुरु पीठ द्वारा आयोजित महर्षि वाल्मीकि जात्रा-2026 जनजागृति जात्रा (मेला) महोत्सव के उद्घाटन समारोह को संबोधित कर रहे थे।
शिक्षा से ही अधिकारों की रक्षा
मुख्यमंत्री ने कहा कि केवल वाल्मीकि समाज ही नहीं, बल्कि सभी शोषित वर्गों को अपना इतिहास याद रखना चाहिए। शिक्षा, संगठन और संघर्ष से ही अधिकारों की रक्षा संभव है। उन्होंने महर्षि वाल्मीकि और वेदव्यास का उदाहरण देते हुए कहा कि शिक्षा ही वह साधन है जिसने शोषित वर्गों को मुख्यधारा में लाने का मार्ग प्रशस्त किया।
जाति व्यवस्था से उपजी असमानता
डॉ. बी.आर. आंबेडकर का हवाला देते हुए उन्होंने कहा कि सामाजिक और आर्थिक स्वतंत्रता के बिना वास्तविक स्वतंत्रता संभव नहीं। जाति व्यवस्था ने समाज में असमानता को जन्म दिया है और इसे दूर करने के लिए शिक्षा सबसे बड़ा हथियार है।
एससीएसपी-टीएसपी में कर्नाटक अग्रणी
मुख्यमंत्री ने कहा कि कर्नाटक सरकार ने अनुसूचित जाति और जनजाति के लिए एससीएसपी-टीएसपी योजना को सख्ती से लागू किया है। वर्ष 2025-26 में इसके तहत 42,018 करोड़ रुपए का प्रावधान किया गया है। उन्होंने दावा किया कि भाजपा शासित राज्यों में यह कानून लागू नहीं है, जबकि कर्नाटक उन चुनिंदा राज्यों में शामिल है जहां इसे प्रभावी रूप से लागू किया गया है और सुप्रीम कोर्ट ने भी इसकी वैधता बरकरार रखी है।
आरक्षण और योजनाओं पर जोर
मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार ने एससी-एसटी ठेकेदारों को ठेकों में आरक्षण, सरकारी कर्मचारियों को पदोन्नति में आरक्षण तथा विभिन्न मठों को भूमि आवंटन किया है। वाल्मीकि मठ को भी 4.18 एकड़ भूमि दी गई है। राज्य में एससी-एसटी आबादी 24.1 प्रतिशत है और इसके अनुरूप आरक्षण बढ़ाने का प्रस्ताव सुप्रीम कोर्ट में लंबित है। इसे नौवीं अनुसूची में शामिल कराने के लिए केंद्र सरकार पर दबाव डाला जाएगा।
चरणबद्ध तरीके से मांगें पूरी होंगी
मुख्यमंत्री ने भरोसा दिलाया कि रोजगार, शिक्षा और सामाजिक-आर्थिक समानता के बिना समता संभव नहीं है। समाज की मांगों को चरणबद्ध तरीके से पूरा किया जाएगा और सरकार सामाजिक न्याय के पक्ष में मजबूती से खड़ी है।

