गेट नंबर-22 क्षतिग्रस्त, रोजाना 300-400 क्यूसेक पानी की बर्बादी
रबकवी-बनहट्टी (बागलकोट). हिप्परगी जलाशय का गेट नंबर-22 टूट जाने से बेलगावी और बागलकोट जिलों में जल संकट की आशंका गहराने लगी है। 6 जनवरी को गेट का पैनल क्षतिग्रस्त होने के बाद प्रतिदिन 300-400 क्यूसेक पानी बहकर निकल रहा है। फिलहाल अस्थायी मरम्मत से रिसाव नियंत्रित करने की कोशिश की जा रही है, लेकिन विशेषज्ञों का कहना है कि जलाशय खाली होने का खतरा बना हुआ है।
अस्थायी मरम्मत से भी नुकसान
अधिकारियों का कहना है कि नदी क्षेत्र में अभी कुछ मात्रा में जल प्रवाह होने के कारण अस्थायी मरम्मत से प्रतिदिन लगभग 75 क्यूसेक पानी बाहर जा रहा है। जैसे ही नहरों में पानी का आवक बंद होगा, कृष्णा नदी का यह हिस्सा सूख सकता है।
1.4 करोड़ रुपए का टेंडर
विशेषज्ञों का मानना है कि गेट बदलने के लिए 1.4 करोड़ रुपए की लागत से टेंडर आमंत्रित किया गया है। अंतिम तिथि 29 जनवरी तय की गई है। इसके बाद ठेकेदार को कार्यादेश दिया जाएगा और फरवरी के दूसरे सप्ताह से गेट की स्थापना शुरू होने की संभावना है। तब तक जलाशय का पानी बहकर समाप्त हो सकता है।
किसानों की मांग
हाल ही में किसानों के सांकेतिक आंदोलन के दौरान कृष्णा क्षेत्र के विधायकों ने महाराष्ट्र सरकार से कम से कम 2 टीएमसी पानी छोडऩे की मांग की। बैठक में विधायक सिद्धू सवदी, डॉ. जगदीश गुडगुंटी, लक्कप्पा पाटील सहित वरिष्ठ किसानों ने सभी 22 गेट नए सिरे से लगाने और जल संग्रहण सुनिश्चित करने की अपील की।
25 साल पुराने गेट
जानकारी के अनुसार, पिछले 25 वर्षों से लगे गेट अपनी मूल 10 मिमी मोटाई खो चुके हैं और अब दबाव से घटकर महज 2 मिमी रह गए हैं। ऐसे में शेष 21 गेट भी किसी भी समय क्षतिग्रस्त हो सकते हैं। यह स्थिति रखरखाव की कमी को उजागर करती है।
सभी गेट बदलना जरूरी
किसान नेता डॉ. धनपाल ने कहा कि वर्तमान गेटों में महाराष्ट्र से आने वाले पानी को रोकने और संग्रह करने की क्षमता नहीं है। सरकार को तत्काल सभी 22 गेट नए सिरे से लगाने और क्रेन की मरम्मत कर बड़े पैमाने पर पानी छोडऩे की व्यवस्था करनी चाहिए।

