दक्षिण कन्नड़ में एफएसटीपी से मिलेगा स्थायी समाधान
शौचालय अपशिष्ट प्रबंधन अब वैज्ञानिक ढंग से
स्वच्छता मिशन का नया चरण: फीकल स्लज ट्रीटमेंट
और तीन तालुकों में कार्य शेष
मेंगलूरु. खुले में शौच से मुक्त (ओडीएफ) घोषित दक्षिण कन्नड़ जिला अब एक नई चुनौती से जूझ रहा है। जिले में बने शौचालयों के गड्ढों में जमा मल-अपशिष्ट (फीकल स्लज) के सुरक्षित और वैज्ञानिक निपटान की समस्या गंभीर होती जा रही है। इसे देखते हुए जिला प्रशासन ने सभी ग्राम पंचायतों को शामिल करते हुए वैज्ञानिक फीकल स्लज ट्रीटमेंट प्लांट (एफएसटीपी) स्थापित करने का निर्णय लिया है।
ग्रामीण क्षेत्रों में बढ़ती समस्या
विशेषकर शहरी सीमा से सटी ग्राम पंचायतों में शौचालय गड्ढे भर जाने से परेशानी बढ़ रही है। वहीं, सक्शन मशीनों से निकाले गए मल-अपशिष्ट का अवैज्ञानिक निपटान भी चिंता का विषय है। इन दोनों समस्याओं के स्थायी समाधान के लिए एफएसटीपी इकाइयों को अपनाने का फैसला किया गया है। स्वच्छ भारत मिशन के दूसरे चरण में ऐसे संयंत्रों को प्राथमिकता दी गई है।
तीन तालुकों में कार्य शेष
जिले का पहला मल-अपशिष्ट प्रबंधन संयंत्र 2021 में बंटवाल तालुक के गोल्तमजलु और बेलतंगडी तालुक के उजिरे में शुरू हुआ था। गोल्तमजलु संयंत्र 25 ग्राम पंचायतों, जबकि उजिरे संयंत्र 24 ग्राम पंचायतों के अपशिष्ट का प्रबंधन कर रहा है। उल्लाल तालुक के नरिंगाना में हाल ही में एक और संयंत्र का उद्घाटन हुआ है। कडबा तालुक के अलंकार में भी निर्माण पूर्ण हो चुका है। सुल्या के पंज और पुत्तूर के कोल्तिगे में कार्य प्रगति पर है, जबकि बेलतंगडी तालुक के चार्माडी में निर्माण अंतिम चरण में है। इसके अलावा मूडबिदरी, मूल्की और मेंगलूरु तालुकों में भी मांग है और भूमि उपलब्ध होते ही कार्य शुरू किया जाएगा।
अवैज्ञानिक निपटान पर केस
कुछ निजी ऑपरेटरों द्वारा शौचालय अपशिष्ट को सार्वजनिक स्थलों पर फेंकने के मामले सामने आए हैं। इस संबंध में एक मामला दर्ज किया गया है। सक्शन मशीन ऑपरेटरों को चेतावनी दी गई है कि अपशिष्ट का निपटान केवल अधिकृत प्रबंधन इकाइयों में ही किया जाए।
कैसे होगा प्रबंधन
यदि किसी घर या व्यावसायिक प्रतिष्ठान का शौचालय गड्ढा भर जाए, तो संबंधित तालुक पंचायत के सक्शन वाहन हेल्पलाइन पर संपर्क करना होगा या ग्राम पंचायत को सूचना देनी होगी। वाहन के माध्यम से अपशिष्ट को एफएसटीपी संयंत्र तक लाया जाएगा, जहां उसका वैज्ञानिक उपचार किया जाएगा।
उपचारित पानी को शुद्ध कर पौधों में उपयोग किया जाएगा। शेष ठोस पदार्थ से जैविक खाद तैयार की जाएगी। एक संयंत्र 25-30 किलोमीटर के दायरे में आने वाली ग्राम पंचायतों के अपशिष्ट का प्रबंधन करेगा।
स्वच्छता के लिए सहयोग जरूरी
शहरी क्षेत्रों से सटी ग्राम पंचायतों में अपशिष्ट निपटान की समस्या और स्वास्थ्य चिंताओं को देखते हुए इन वैज्ञानिक इकाइयों को प्राथमिकता दी जा रही है। स्वच्छता के लिए प्रसिद्ध जिले में शौचालय अपशिष्ट प्रबंधन पर भी समान ध्यान देना आवश्यक है, जिसके लिए सभी के सहयोग की जरूरत है।
–जयलक्ष्मी, उप सचिव, जिला पंचायत, दक्षिण कन्नड़

