होटल-रिसॉर्ट निर्माण को मिली हरी झंडी
सख्त सीआरजेड नियम बने बाधा
मेंगलूरु. केंद्रीय पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय ने राष्ट्रीय तटीय क्षेत्र प्रबंधन प्राधिकरण की सिफारिश पर कर्नाटक के तटीय क्षेत्र प्रबंधन योजना को मंजूरी दे दी है। इसके तहत उडुपी, दक्षिण कन्नड़ और उत्तर कन्नड़ जिलों के 92 समुद्र तटों पर होटल, रिसॉर्ट, बंदरगाह, शैक, जलक्रीड़ा और साहसिक खेलों जैसी पर्यटन गतिविधियों को अनुमति दी गई है।
हालांकि, इन परियोजनाओं के लिए तटीय नियामक क्षेत्र (सीआरजेड) के सख्त नियमों का पालन करना अनिवार्य होगा। सीआरजेड-1ए में केवल कंदलवन मार्ग, लकड़ी की झोपड़ी और प्राकृतिक सडक़ निर्माण की अनुमति है, जबकि सीआरजेड-2 में होटल और रिसॉर्ट केवल चिन्हित क्षेत्रों में ही बनाए जा सकते हैं। सीआरजेड-3 में अस्थायी पर्यटन सुविधाएं जैसे शौचालय, कपड़े बदलने के कमरे, शावर पैनल और बैठने की व्यवस्था समुद्र की लहरों की उच्चतम सीमा से कम से कम 10 मीटर दूर ही स्थापित की जा सकती हैं।
राज्य पर्यटन विभाग ने सभी समुद्र तटों को मानचित्र में दर्शाते हुए गतिविधियों के लिए निर्धारित क्षेत्र और आकार तय किया है। सीआरजेड-1ए, 1बी और 4ए, 4बी की परियोजनाओं के लिए केंद्र सरकार से अनुमति लेनी होगी, जबकि सीआरजेड-2 और 3 की गतिविधियों के लिए राज्य तटीय क्षेत्र प्रबंधन प्राधिकरण से ऑनलाइन स्वीकृति आवश्यक है।
पर्यटन प्रमोटर यतीश बैकंपाडी ने कहा कि 2019 की अधिसूचना के दिशा-निर्देश अब भी अस्पष्ट हैं। 2024 में नई अधिसूचना जारी होनी थी, लेकिन अब 2026 में भी हम प्रतीक्षा कर रहे हैं। यदि जल्द नए नियम नहीं बने तो कई निवेश और परियोजनाएं हाथ से निकल जाएंगी।
इस मंजूरी से तटीय पर्यटन को नई दिशा मिलने की उम्मीद है, लेकिन नियमों की जटिलता निवेशकों के लिए बड़ी चुनौती बनी हुई है।

