मेंगलूरु में पेयजल संकट की आशंका
जलसिरी परियोजना में देरी
मेंगलूरु. बंटवाल तालुक के तुम्बे बांध में फिलहाल केवल 10.42 मिलियन क्यूबिक मीटर (एमसीएम) पानी संग्रहित है, जो लगभग 39 दिनों तक ही मेंगलूरु शहर और आसपास के क्षेत्रों को आपूर्ति कर सकता है।
इस बारे में जानकारी देते हुए मेंगलूरु महानगर निगम के अधिकारियों ने बताया कि यदि जल संकट गहराता है तो उद्योगों को पानी की आपूर्ति रोकनी पड़ेगी और नदी किनारे कृषि-बागवानी के लिए उपयोग किए जा रहे पंपसेटों की बिजली भी काटनी पड़ सकती है। वर्तमान में बांध से प्रतिदिन 0.26 एमसीएम पानी 60 वार्डों और मुल्की, उडुपी, पुदु, अड्यार तथा उल्लाल जैसे क्षेत्रों को दिया जा रहा है।
2017, 2019 और 2023 में भी नदी का जलस्तर घटने से पेयजल संकट उत्पन्न हुआ था। इस बार भी वही स्थिति बनने की आशंका है। महानगर निगम ने वैकल्पिक उपायों के तहत 140 बोरवेलों का उपयोग करने, नए बोरवेल खोदने और खुले कुंओं की सफाई कर उन्हें उपयोग में लाने की योजना बनाई है। आवश्यकता पडऩे पर टैंकरों से भी पानी पहुंचाया जाएगा।
जलसिरी परियोजना में देरी
मेंगलूरु को दीर्घकालिक जल आपूर्ति सुनिश्चित करने वाली जलसिरी परियोजना अभी तक पूरी नहीं हो सकी है। 63 प्रतिशत काम पूरा हो चुका है, लेकिन ठेकेदारों ने इस वर्ष दिसंबर तक समयवृद्धि की मांग की है। राष्ट्रीय राजमार्ग और रेलवे विभाग से अनुमति में देरी तथा अन्य तकनीकी अड़चनों के कारण परियोजना की समयसीमा 2025 तक बढ़ाई गई थी।
गंगापूजा और मंत्री का निर्देश
जिला प्रभारी मंत्री दिनेश गुंडूराव ने नेत्रावती नदी में बागिन अर्पित कर गंगापूजा की। उन्होंने कहा कि इस बार बारिश देर से होने की संभावना है, इसलिए जून तक जल भंडार बनाए रखने की व्यवस्था करनी होगी ताकि शहर में पेयजल संकट न हो।
इस अवसर पर मेस्कॉम अध्यक्ष हरीश कुमार, विधान परिषद सदस्य आइवन डिसोजा, पूर्व मंत्री रमानाथ राई, जिलाधिकारी दर्शन एच.वी. और महानगर निगम आयुक्त रविचंद्र नायक उपस्थित थे।
यह स्थिति स्पष्ट करती है कि यदि समय पर वर्षा नहीं हुई तो मंगलुरु और आसपास के क्षेत्रों में जल संकट गंभीर रूप ले सकता है।

