शिवमोग्गा की तारण्या बनी साहस की मिसाल
शिक्षकों और परिवार के सहयोग से लिखा भविष्य
शिवमोग्गा. जिले से एक भावुक कर देने वाली घटना सामने आई है, जहां एक छात्रा ने अपने पिता के निधन के गहरे सदमे के बावजूद एसएसएलसी परीक्षा देकर अदम्य साहस का परिचय दिया। हसूडी फार्म क्षेत्र की रहने वाली तारण्या ने इस कठिन परिस्थिति में भी अपने भविष्य को प्राथमिकता देते हुए मानसिक दृढ़ता का उदाहरण पेश किया।
तारण्या के पिता तंगराज और मां मीना दिहाड़ी मजदूरी कर परिवार का पालन-पोषण करते थे। उनका सपना था कि उनकी बेटियां अच्छी शिक्षा प्राप्त कर जीवन में आगे बढ़ें। लेकिन बीमारी से जूझ रहे तंगराज ने विष सेवन कर आत्महत्या कर ली, जिससे परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा।
इसी बीच, बुधवार को तारण्या की अंग्रेजी विषय की एसएसएलसी परीक्षा थी। एक ओर पिता को खोने का गहरा आघात, तो दूसरी ओर जीवन की महत्वपूर्ण परीक्षा—इन दोनों परिस्थितियों के बीच वह मानसिक रूप से टूट चुकी थी।
परिवार और शिक्षकों ने बढ़ाया हौसला
परिवारजनों, शिक्षकों और दोस्तों ने तारण्या को संभाला और उसे परीक्षा देने के लिए प्रेरित किया। उनके सहयोग से तारण्या ने अपने दर्द को दिल में दबाकर परीक्षा केंद्र पहुंचकर पेपर लिखा।
सबसे भावुक पल तब आया, जब परीक्षा समाप्त करने के बाद वह सीधे घर पहुंची और अपने पिता के अंतिम दर्शन किए। यह दृश्य हर किसी की आंखें नम कर देने वाला था।
छात्रा का दर्द
तारण्या ने कहा कि मैंने दुख के बीच भी परीक्षा अच्छी तरह से लिखी है, लेकिन पिता को खोने का दर्द सहना बहुत मुश्किल है। आगे का जीवन कैसा होगा, यह सोचकर डर लग रहा है।
मदद की जरूरत
अब तारण्या पर मां और छोटी बहन की जिम्मेदारी आ गई है। गांव के लोगों ने मदद का आश्वासन दिया है, लेकिन यह सहायता कितने समय तक जारी रहेगी, यह बड़ा सवाल बना हुआ है।
यह घटना न केवल एक छात्रा की हिम्मत को दर्शाती है, बल्कि यह भी बताती है कि विपरीत परिस्थितियों में भी दृढ़ निश्चय और समर्थन से आगे बढ़ा जा सकता है। तारण्या का साहस आज कई लोगों के लिए प्रेरणा बन गया है।
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