बेलगावी में खेती और जनजीवन पर संकट
बारिश, ओलावृष्टि और तेज हवाओं से फसलों को भारी नुकसान, एक की मौत
अधिकारियों ने जताई चिंता
बेलगावी. उत्तर कर्नाटक में गर्मियों के दौरान होने वाली बेमौसम बारिश, जिसे स्थानीय भाषा में ‘अड्डमळे’ कहा जाता है, इस बार जिले के लिए गंभीर संकट बन गई है। पिछले एक महीने से रुक-रुक कर हो रही बारिश ने मौसम का पूरा संतुलन बिगाड़ दिया है। हालात ऐसे हैं कि लोगों को यह समझना मुश्किल हो रहा है कि यह गर्मी का मौसम है या बारिश का।
आम तौर पर अप्रेल के पहले सप्ताह तक तापमान 40 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच जाता है, लेकिन इस बार अधिकतम तापमान 34 डिग्री और न्यूनतम 20 डिग्री दर्ज किया गया है। लगातार हो रही बारिश ने न केवल तापमान को प्रभावित किया है, बल्कि कृषि, स्वास्थ्य और दैनिक जीवन पर भी नकारात्मक असर डाला है।
फसलों को भारी नुकसान, किसान परेशान
बेमौसम बारिश और ओलावृष्टि ने किसानों की चिंता बढ़ा दी है। जिले में लगभग 220 हेक्टेयर क्षेत्र में खड़ी फसलें बर्बाद हो गई हैं।
कृषि विभाग के संयुक्त निदेशक एच.डी. कोळेकर ने बताया कि करीब 116 हेक्टेयर में उगाई गई मक्का, गन्ना और गेहूं की फसलें क्षतिग्रस्त हुई हैं। फिलहाल हल्की बारिश से ज्यादा नुकसान नहीं होगा, लेकिन लगातार वर्षा चिंता का विषय है। सर्वे कर रिपोर्ट तैयार की गई है।
बागवानी फसलें भी प्रभावित
बागवानी विभाग के संयुक्त निदेशक महांतेश मुरगोड के अनुसार, मामूली आकलन में ही 104 हेक्टेयर में आम, अंगूर और सब्जियों की फसलें प्रभावित हुई हैं। सरकार को रिपोर्ट भेज दी गई है। विशेष रूप से बेलगावी का आम, जिसकी मांग महाराष्ट्र और गोवा तक रहती है, इस बार प्रभावित हुआ है। समय पर फूल नहीं आने से उत्पादन में कमी की आशंका है।
अंगूर उत्पादकों पर सबसे बड़ा संकट
अथणी, चिक्कोडी और निप्पाणी क्षेत्रों में अंगूर की खेती बड़े पैमाने पर होती है। ओलावृष्टि के कारण बड़ी मात्रा में अंगूर नष्ट हो गए हैं। किसान बताते हैं कि इस समय फसल तैयार होती है, ऐसे में नुकसान से उन्हें भारी आर्थिक झटका लगा है।
जनजीवन पर भी असर
बारिश और तेज हवाओं के कारण जिले में एक व्यक्ति की मौत हो चुकी है। कई जगह पेड़ और बिजली के खंभे गिर गए हैं, जिससे घरों को नुकसान पहुंचा है।
हेस्कॉम अधिकारियों के अनुसार, मार्च महीने में ही 6 ट्रांसफॉर्मर जल गए और 27 बिजली के खंभे गिर गए हैं। मरम्मत कार्य जारी है, कुल नुकसान का आकलन किया जा रहा है।
ओलावृष्टि से पशुधन की हानि
हक्केरी तालुक के संकेश्वर क्षेत्र में ओलावृष्टि के कारण 39 भेड़ों की मौत हो गई। पशुपालक शंकर करजगी को भारी नुकसान हुआ है।
विशेषज्ञों की चेतावनी
कृषि वैज्ञानिक बसवराज ने बताया कि असमय बारिश जलवायु परिवर्तन का संकेत है। पहले ऐसी घटनाएं कम होती थीं, लेकिन अब प्रदूषण और तापमान बढऩे से इनकी आवृत्ति बढ़ गई है। समय से पहले हुई बारिश खेती के लिए हानिकारक है।
संभावित संकट के संकेत
ग्रामीणों का मानना है कि अधिक ‘बेमौसम बारिश’ भविष्य में सूखे का संकेत हो सकता है। हालांकि वैज्ञानिक इसे सीधे तौर पर नहीं जोड़ते, लेकिन बदलते मौसम को लेकर चिंता जरूर बढ़ गई है।
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