आंतरिक आरक्षण पर निर्णय होने तक रिक्तियों को नहीं भरा जाएगाबेंगलूरु में विधान मंडल सत्र में विधान परिषद में सदस्य मंजेगौड़ा की ओर से पूछे गए एक प्रश्न का उत्तर देते हुए चिकित्सा शिक्षा मंत्री डॉ. शरण प्रकाश पाटिल।

डॉ. शरण प्रकाश पाटिल ने कहा

कलबुर्गी. चिकित्सा शिक्षा मंत्री डॉ. शरण प्रकाश पाटिल ने विधान परिषद को बताया कि राज्य सरकार की ओर से आंतरिक आरक्षण पर स्पष्ट निर्णय लेने के बाद ही मेडिकल कॉलेजों में रिक्तियों को भरा जाएगा।

वेे सोमवार को बेंगलूरु में विधान मंडल सत्र में विधान परिषद के प्रश्नकाल के दौरान सदस्य मंजेगौड़ा की ओर से पूछे गए एक प्रश्न का उत्तर देते हुए कहा कि उच्च न्यायालय के सेवानिवृत्त न्यायाधीश एच.एन. नागमोहन दास ने आंतरिक आरक्षण के संबंध में सरकार को एक रिपोर्ट सौंपी है। इस रिपोर्ट पर कैबिनेट बैठक में चर्चा की गई और अगली विशेष कैबिनेट बैठक में अंतिम निर्णय लिए जाने की संभावना है।

उन्होंने स्पष्ट किया कि मुख्यमंत्री ने निर्देश दिया है कि जब तक सरकार आंतरिक आरक्षण पर अंतिम निर्णय नहीं ले लेती, तब तक किसी भी विभाग में कोई भी पद नहीं भरा जाएगा। तब तक हम कुछ नहीं कर पाएंगे।

मंत्री पाटिल ने कहा कि मेडिकल कॉलेजों में कुल 21,860 पद हैं। इनमें से 9,413 पद भरे जा चुके हैं। 12,447 पद रिक्त हैं। रिक्तियों के बावजूद, मेडिकल कॉलेजों में पढ़ाई और अस्पतालों में मरीजों के इलाज में कोई समस्या नहीं है। सरकार ने सभी एहतियाती कदम उठाए हैं।

उन्होंने कहा कि मेडिकल कॉलेजों के निदेशकों और संबंधित अस्पतालों के प्रमुखों को जहां भी आवश्यक हो, आउटसोर्सिंग के माध्यम से कर्मचारियों की भर्ती करने का निर्देश दिया गया है। यादगीर, रायचूर, कलबुर्गी सहित कुछ अन्य मेडिकल कॉलेजों में पद पहले ही भरे जा चुके हैं।

मंत्री ने आश्वासन दिया कि यदि किसी कॉलेज या अस्पताल में कोई समस्या है तो उसका समाधान तुरंत किया जाएगा।

Spread the love

By Bharat Ki Awaz

मैं भारत की आवाज़ हिंदी न्यूज़ पोर्टल से जुड़ा हुआ हूँ, जहाँ मेरा उद्देश्य पाठकों तक सटीक, निष्पक्ष और ताज़ा ख़बरें पहुँचाना है। राजनीति, समाज, संस्कृति और स्थानीय मुद्दों पर गहरी रुचि रखते हुए मैं हमेशा कोशिश करता हूँ कि समाचार केवल सूचना न हों, बल्कि पाठकों को सोचने और समझने का अवसर भी दें। मेरी लेखनी का मक़सद है—जनता की आवाज़ को मंच देना और देश-समाज से जुड़े हर पहलू को ईमानदारी से प्रस्तुत करना। भारत की आवाज़ के माध्यम से मैं चाहता हूँ कि पाठक न केवल ख़बरें पढ़ें, बल्कि उनसे जुड़ाव महसूस करें।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *