सिंचाई और पेयजल पर संकट
450 से अधिक पंपसेट बंद, किसान परेशान
सिरसी. उत्तर कन्नड़ जिले के सिरसी तालुक के बनवासी होबली (राजस्व केंद्र) की जीवनरेखा मानी जाने वाली वरदा नदी में गर्मी की शुरुआत के साथ ही जलप्रवाह घट गया है। नदी का तल सूखने की कगार पर है, जिससे खेती और पेयजल आपूर्ति दोनों पर गंभीर असर पडऩे लगा है।
करीब 6 किलोमीटर क्षेत्र में बहने वाली यह नदी 6 से अधिक ग्राम पंचायतों के किसानों के लिए मुख्य जलस्रोत है। सामान्य वर्षों में मार्च तक पानी उपलब्ध रहता है, लेकिन इस बार शुरुआती गर्मी में ही हालात बिगड़ गए हैं। लगभग 6-7 हजार हेक्टेयर क्षेत्र में धान, मक्का, अनानास, सुपारी, केला और अदरक जैसी फसलें इसी नदी के भरोसे उगाई जाती हैं।
नदी के सूखने से भूजल स्तर भी तेजी से गिरा है। आसपास के तालाब और कुएं भी सूखने लगे हैं। करीब 1,150 पंपसेट में से 450 से अधिक बंद हो चुके हैं। किसानों का आरोप है कि नदी में अवैध रेत खनन से बने गड्ढों ने प्राकृतिक प्रवाह को बाधित कर दिया है।
स्थानीय किसान बसवराज गौड़ा ने कहा कि बिजली की बार-बार कटौती ने हमारी मुश्किलें और बढ़ा दी हैं। दिन में कई बार बिजली जाने से बचा हुआ पानी भी खेतों तक नहीं पहुंचा पा रहे हैं।
यह संकट केवल खेती तक सीमित नहीं है। बनवासी कस्बे की पेयजल योजना भी इसी नदी पर निर्भर है। जलप्रवाह रुकने से शहर में पानी की किल्लत के संकेत मिलने लगे हैं। पशुओं के लिए भी पानी की कमी हो गई है, जिससे दुग्ध व्यवसाय करने वाले परिवार प्रभावित हो रहे हैं।
किसान सुरेश नायक ने बताया कि इस क्षेत्र में बांध और जलसंचय संरचनाएं बनाई गई हैं, लेकिन उनका लाभ अधिकांश किसानों तक नहीं पहुंच रहा। हर साल गर्मियों में समस्या और गंभीर हो जाती है।
किसानों ने आरोप लगाया कि वरदा नदी से तालाबों को भरने की महत्वाकांक्षी योजना पर करोड़ों रुपए खर्च किए गए, लेकिन वह केवल कागजों तक सीमित रह गई। यदि संकट के समय योजना काम न आए, तो उसका क्या लाभ?
ग्रामीणों ने सरकार से तत्काल हस्तक्षेप कर जल प्रबंधन और सिंचाई व्यवस्था को सुधारने की मांग की है, ताकि आने वाले दिनों में स्थिति और खराब न हो।
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