ऑटो चालकों की बढ़ी परेशानी
एलपीजी-सीएनजी की कमी से जनजीवन प्रभावित
खाने-पीने की कीमतों में उछाल
उडुपी. मध्य-पूर्व में चल रहे युद्ध का असर अब उडुपी जिले में भी साफ दिखाई देने लगा है। ईंधन आपूर्ति में अनिश्चितता और एलपीजी की कमी के कारण होटल व्यवसाय, ऑटो रिक्शा चालक और आम लोग गंभीर संकट का सामना कर रहे हैं। गैस की कमी ने जहां खाने-पीने की चीजों को महंगा कर दिया है, वहीं परिवहन व्यवस्था भी प्रभावित हो रही है।
होटल उद्योग पर संकट गहराया
उडुपी जिले में करीब 2500 से अधिक होटल और छोटे भोजनालय संचालित होते हैं, जो पूरी तरह एलपीजी पर निर्भर हैं। सामान्यत: एक होटल को सप्ताह में 10-12 सिलेंडर की आवश्यकता होती है, लेकिन अब तीन दिन में मुश्किल से एक सिलेंडर मिल रहा है। काला बाजार में भी गैस उपलब्ध नहीं है।
एक महीने पहले 19 किलो का वाणिज्यिक सिलेंडर 2600 में मिल रहा था, जो अब 4000 से 4500 रुपए तक पहुंच गया है। बढ़ती लागत के कारण होटल मालिकों को मजबूरी में खाने के दाम बढ़ाने पड़ रहे हैं।
मेन्यू में कटौती, ग्राहकों पर असर
गैस की कमी के चलते कई होटलों में चपाती, पूरी, डोसा और तले हुए व्यंजन अस्थायी रूप से बंद कर दिए गए हैं। मछली भोजन की कीमत 120 से 140 रुपए तक पहुंच गई है, जबकि पहले यह 100 रुपए के आसपास मिलती थी। सस्ते भोजन जैसे गंजी और ऑमलेट की कीमत भी 50-60 रुपए तक बढ़ गई है।
ऑटो चालकों की बढ़ी मुश्किलें
एलपीजी और सीएनजी की कमी का सबसे ज्यादा असर ऑटो रिक्शा चालकों पर पड़ा है। जहां पहले एलपीजी 60 रुपए प्रति किलो मिलती थी, अब यह 91 रुपए प्रति किलो तक पहुंच गई है। कई गैस पंप पर सप्लाई बंद होने से चालक घंटों इंतजार करने को मजबूर हैं।
उडुपी और मलपे क्षेत्र में सीएनजी की भी कमी देखी जा रही है, जिसके चलते व्हाट्सऐप ग्रुप्स के जरिए चालकों को पंप पर न आने की सूचना दी जा रही है।
सरकार से कार्रवाई की मांग
मजदूर संगठनों का आरोप है कि कुछ निजी वितरक युद्ध का बहाना बनाकर कीमतें बढ़ा रहे हैं। उन्होंने सरकार से ऐसे लोगों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग की है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि जल्द ही स्थिति नहीं सुधरी, तो इसका सीधा असर आम जनता और दैनिक मजदूरों की जिंदगी पर और गहरा पड़ेगा।
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