आजीविका पर संकट
इलकल (बागलकोट). शहर में गैस सिलेंडर की कमी ने आम जनजीवन के साथ-साथ महिलाओं की आजीविका पर भी गहरा असर डाला है। खासकर वे महिलाएं, जो ज्वार की रोटी बनाकर अपना घर चलाती थीं, अब काम ठप होने से आर्थिक संकट का सामना कर रही हैं।
शहर में कई महिलाएं ज्वार की नरम रोटी बनाकर 6-7 रुपए प्रति रोटी के हिसाब से बेचती थीं। इसके अलावा वे तिल डालकर कडक़ रोटियां (खाखरे जैसी) भी तैयार करती थीं, जो 10 से 15 दिनों तक सुरक्षित रहती हैं। कुछ महिलाएं छोटे स्तर पर 10 से 50-60 लोगों के लिए अल्पाहार और भोजन भी तैयार कर देती थीं।
लेकिन गैस सिलेंडर की आपूर्ति बाधित होने से इनका काम लगभग बंद हो गया है। एक स्थानीय परिवार ने बताया कि ज्वार की रोटी स्वास्थ्य के लिए लाभकारी होती है, इसलिए कई लोग नियमित रूप से इन महिलाओं से रोटियां बनवाते थे। वहीं, जिन्हें खुद रोटी बनाना नहीं आता, वे बाहर से ही मंगवाते थे।
गैस संकट का असर केवल घरों तक सीमित नहीं है, बल्कि होटलों और ढाबों पर भी साफ दिखाई दे रहा है। कई स्थानों पर गैस की कमी के कारण व्यंजन बनाना बंद कर दिया गया है।
इलकल के कई लोगों के महाराष्ट्र में रिश्तेदार हैं, जहां ज्वार की कडक़ रोटी के साथ दही, फुटाणा और गुराल की चटनी बड़े चाव से खाई जाती है। ऐसे में इस पारंपरिक खाद्य व्यवस्था पर भी असर पड़ा है।
एक महिला रसोइया ने बताया कि गैस सिलेंडर उपलब्ध न होने के कारण अब उन्हें फिर से चूल्हे का सहारा लेना पड़ रहा है, जिससे समय और श्रम दोनों बढ़ रहे हैं।
स्थानीय लोगों ने प्रशासन से मांग की है कि गैस सिलेंडर की किल्लत को जल्द दूर किया जाए, ताकि आम जनता और खासकर महिलाओं को राहत मिल सके।
