सादिक पहलवान ने लिया नामांकन वापस, सीएम सिद्धरामय्या ने जताया भरोसा
बेंगलूरु: कर्नाटक की दावणगेरे उपचुनाव में बड़ा राजनीतिक घटनाक्रम सामने आया है। निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में मैदान में उतरे सादिक पहलवान ने चुनावी मुकाबले से हटने की घोषणा कर दी है। इसके बाद मुख्यमंत्री सिद्धरामय्या ने विश्वास जताया है कि दावणगेरे और बागलकोट दोनों सीटों पर कांग्रेस की जीत तय है।
मुख्यमंत्री सिद्धरामय्या ने संवाददाता सम्मेलन को संबोधिल करते हुए कहा कि सादिक पहलवान उनके पुराने परिचित हैं और पिछले करीब 40 वर्षों से कांग्रेस के निष्ठावान कार्यकर्ता रहे हैं। किसी भी कार्यकर्ता का टिकट की इच्छा रखना स्वाभाविक है, लेकिन पार्टी के सामूहिक निर्णय को स्वीकार करना भी उतना ही महत्वपूर्ण है।
सीएम ने बताया कि हाल ही में 11 उम्मीदवारों ने अपने नामांकन वापस लिए हैं। पार्टी के अनुरोध पर सादिक पहलवान ने भी चुनाव मैदान से हटने का निर्णय लिया, जिसके लिए उन्होंने उनका आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि इस फैसले से कांग्रेस को चुनाव में मजबूती मिलेगी।
सिद्धरामय्या ने स्पष्ट किया कि दावणगेरे में टिकट चयन पार्टी हाईकमान के निर्णय के अनुसार किया गया। परंपरा के तहत दिवंगत नेता के परिवार को अवसर देते हुए मंत्री एस.एस. मल्लिकार्जुन के पुत्र समर्थ को उम्मीदवार बनाया गया है। क्षेत्र में लगभग 70 हजार मुस्लिम मतदाता हैं और सादिक पहलवान भी टिकट के प्रमुख दावेदारों में शामिल थे।
सीएम ने कहा कि विधायक रिजवान अर्शद, विधान परिषद के मुख्य सचेतक सलीम अहमद और उनके राजनीतिक सचिव नजीर अहमद दावणगेरे गए थे, लेकिन उनके देर से पहुंचने के कारण नामांकन प्रक्रिया को रोका नहीं जा सका। वहीं, विधानसभा में व्यस्तता के चलते वे स्वयं नहीं जा सके।
सादिक पहलवान के चुनाव से हटने के बाद कांग्रेस खेमे में उत्साह बढ़ गया है। पार्टी अब पूरी ताकत के साथ अपने अधिकृत उम्मीदवार के समर्थन में जुट गई है, जिससे दोनों सीटों पर जीत की उम्मीद और प्रबल हो गई है।
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