करीब 470 ग्राम सोने के आभूषण, देवी अलंकरण के होने की संभावना
वर्तमान कीमत लगभग 80 लाख रुपए
गदग. स्वर्ण खजाने की जांच कर रही विशेषज्ञ समिति के अध्यक्ष डॉ. एमएस. कृष्णमूर्ति ने कहा कि जिले के ऐतिहासिक लक्कुंडी क्षेत्र में मिला स्वर्ण खजाना लगभग 500 से 600 वर्ष पुराना होने की संभावना है और यह विजयनगर साम्राज्य काल के आभूषण हो सकते हैं।
जिला प्रशासन भवन में स्वर्ण खजाने का निरीक्षण करने के बाद कृष्णमूर्ति ने कहा कि मिले आभूषणों का आकार, बनावट, शिल्प और कलात्मक डिजाइन का अध्ययन करने पर यह विजयनगर काल से संबंधित प्रतीत होते हैं। जांच में पाया गया कि कुल लगभग 466 से 470 ग्राम वजन के स्वर्ण आभूषण मिले हैं।
डॉ. कृष्णमूर्ति के अनुसार इन आभूषणों में सिंह और कीर्तिमुख जैसी आकृतियों के साथ नीलम, पन्ना, मोती और मूंगा जैसे रत्न जड़े हुए हैं। ऐसे आभूषण आम लोगों द्वारा उपयोग नहीं किए जाते थे और संभवत: इन्हें कांस्य की देवी प्रतिमाओं के अलंकरण के लिए बनाया गया होगा। इनमें नागरहट्टे शैली के आभूषण, कर्णफूल और बारीक नक्काशी स्पष्ट रूप से दिखाई देती है।
उन्होंने कहा कि वर्तमान बाजार मूल्य के अनुसार इन आभूषणों में प्रयुक्त सोने की कीमत करीब 80 लाख रुपए हो सकती है, लेकिन प्राचीन और दुर्लभ होने के कारण इनकी वास्तविक ऐतिहासिक कीमत इससे लगभग 10 गुना अधिक हो सकती है।
लक्कुंडी में मिले इस स्वर्ण भंडार की अवधि और मूल्यांकन के लिए राज्य सरकार ने डॉ. एमएस कृष्णमूर्ति के नेतृत्व में पांच सदस्यीय विशेषज्ञ समिति का गठन किया था। समिति द्वारा जांच के बाद इसके ऐतिहासिक महत्व पर विस्तृत रिपोर्ट तैयार की जा रही है।

