गंदे नाले और शहरी नालों से नदी में मिल रहा सीवेज
सीवरेज व्यवस्था नहीं होने से बढ़ रही समस्या
बंटवाल (दक्षिण कन्नड़). दक्षिण कन्नड़ जिले की जीवनदायिनी नेत्रावती नदी इन दिनों गंभीर प्रदूषण की समस्या से जूझ रही है। बंटवाल और आसपास के क्षेत्रों से बहकर आने वाला गंदा पानी सीधे नदी में मिल रहा है, जिससे पेयजल की गुणवत्ता को लेकर चिंता बढ़ गई है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि 2018 के विधानसभा चुनाव के समय यह मुद्दा काफी चर्चा में था। उस दौरान कई वादे और बहसें हुईं, लेकिन 2026 तक भी समस्या का स्थायी समाधान नहीं हो पाया है। प्रशासन ने कुछ समय के लिए ध्यान दिया, लेकिन बाद में फिर से इस मुद्दे पर चुप्पी साध ली।
पानी भरने के स्थान पर ही गंदगी
बंटवाल के बस्तिपड्पु इलाके के पास नालों के माध्यम से तेज गर्मी के समय भी गंदा पानी नदी में बह रहा है। नदी किनारे पाइप लगाकर भी कई जगहों से कचरा और सीवेज सीधे नदी में डाला जा रहा है। इससे वही पानी दूषित हो रहा है जिसे लोगों के पीने के लिए इस्तेमाल किया जाता है।
सीवरेज सिस्टम का अभाव
बंटवाल नगरपालिका क्षेत्र में उचित सीवरेज व्यवस्था नहीं होने के कारण यह समस्या और गंभीर हो गई है। प्रतिदिन लगभग 10 हजार से अधिक घरों का गंदा पानी सीधे नदी में मिल रहा है। सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (एसटीपी) बनाने के लिए भूमि विवाद अब तक सुलझ नहीं पाया है, इसलिए परियोजना लागू नहीं हो सकी।
नालों के जरिए नदी में गंदा पानी
बड्डकट्टे, केलगिन पेटे, कंचिगार पेटे, गूडिनबली, कैकुंजे, पाणेमेंगलूरु, परलिया और तलपाडी सहित कई इलाकों से नालों और शहरी नालों के जरिए गंदा पानी सीधे नदी में जा रहा है। घरों के शौचालय का पानी, होटलों का कचरा और मांस की दुकानों का अपशिष्ट भी इसी तरह नदी में मिल रहा है।
समाधान की मांग
स्थानीय लोगों और पर्यावरण कार्यकर्ताओं ने बंटवाल और आसपास के क्षेत्रों में समुचित सीवरेज प्रणाली लागू करने, बड़े सोख्ता गड्ढे बनाने और कचरे के उचित प्रबंधन की मांग की है, ताकि नेत्रावती नदी का पानी प्रदूषित होने से बचाया जा सके।
नियमों का सख्ती से पालन हो
नदी में प्लास्टिक और गंदा कचरा डालने वालों के खिलाफ प्रशासन को कड़ी कार्रवाई करनी चाहिए। जब तक नियमों का सख्ती से पालन नहीं होगा, तब तक नदी को प्रदूषण से बचाना संभव नहीं होगा।
–शीन शेट्टी, संस्थापक, जनशिक्षण ट्रस्ट

