युद्ध के साये से सुरक्षित लौटे मेंगलूरु के नाविक
परिवार ने ली राहत की सांस
ईरान-इजराइल तनाव के बीच 40 हजार मीट्रिक टन एलपीजी लेकर लौटे मरीन इंजीनियर की पत्नी बोलीं – ‘यह गर्व का क्षण’
मेंगलूरु. ईरान, इजराइल और अमरीका के बीच बढ़ते सैन्य तनाव के कारण होर्मुज जलडमरूमध्य में फंसे मेंगलूरु के एक नाविक के सुरक्षित भारत लौटने पर उनके परिवार ने राहत की सांस ली है। यह नाविक 40 हजार मीट्रिक टन एलपीजी से भरे जहाज पर मरीन इंजीनियर के रूप में कार्यरत थे।
भय और अनिश्चितता के बीच बीते दिन
नाविक की पत्नी ने बताया कि शुरुआती दिनों में उन्हें स्थिति की गंभीरता का अंदाजा नहीं था, लेकिन जैसे-जैसे दिन बीतते गए, चिंता बढ़ती गई। कई दिनों तक पति से संपर्क नहीं हो सका, जिससे परिवार गहरे तनाव में रहा। टीवी पर युद्ध और हमलों की खबरें देखना भी उनके लिए कठिन हो गया था।
संपर्क टूटने से बढ़ी बेचैनी
करीब एक सप्ताह बाद जब संपर्क हुआ, तो नाविक ने बताया कि क्षेत्र में हमलों की घटनाएं हो रही हैं और जहाज वहां से निकलने में असमर्थ है। इस जानकारी ने परिवार की चिंता को और बढ़ा दिया। नेटवर्क की समस्या के कारण बार-बार संपर्क टूटता रहा, जिससे हर दिन असमंजस और भय में बीता।
संकट के बीच निभाया कर्तव्य
दो सप्ताह बाद जहाज के होर्मुज जलडमरूमध्य के पास पहुंचने की सूचना मिली, जिससे थोड़ी राहत मिली। हालांकि, वहां की स्थिति को देखते हुए डर बना रहा। अंतत: कुछ दिनों बाद नाविक ने सुरक्षित क्षेत्र की ओर लौटने की जानकारी दी।
सुरक्षित वापसी से खुशी का माहौल
एक सप्ताह बाद जब नाविक के होर्मुज पार कर भारत पहुंचने की खबर मिली, तो पूरे परिवार में खुशी की लहर दौड़ गई। बच्चों से लेकर बुजुर्गों तक सभी ने राहत महसूस की। नाविक की बेटी ने तो स्कूल में अपने पिता की चिंता में रोने की बात भी सामने आई।
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