आदर्श ग्राम योजना से वंचित रहे दक्षिण कन्नड़-उडुपीप्रधानमंत्री आदर्श ग्राम योजना का लोगो।

जनसंख्या मानदंड बना बाधा

तटीय जिलों के एससी समुदाय को नहीं मिला लाभ

बंटवाल (दक्षिण कन्नड). केंद्र सरकार की महत्वाकांक्षी प्रधानमंत्री आदर्श ग्राम योजना के तहत जहां कर्नाटक के अधिकांश जिलों में विकास कार्य चल रहे हैं, वहीं दक्षिण कन्नड़ और उडुपी जिले इस योजना से पूरी तरह वंचित रह गए हैं। सख्त जनसंख्या मानदंडों के कारण इन तटीय क्षेत्रों के गांव योजना के दायरे में नहीं आ सके हैं।

29 जिलों में योजना, लेकिन तटीय क्षेत्र बाहर

राज्य के 29 जिलों में यह योजना लागू है, लेकिन दक्षिण कन्नड़ और उडुपी के एक भी गांव का चयन नहीं हुआ। वर्ष 2025-26 में राज्य के 467 गांवों को इस योजना के लिए चुना गया, जिसमें कोलार (84), चिक्कबल्लापुर (50) और तुमकूरु (48) जैसे जिलों को प्राथमिकता मिली, जबकि तटीय क्षेत्रों को पूरी तरह नजरअंदाज किया गया।

जनसंख्या मानदंड बना मुख्य कारण

अधिकारियों के अनुसार, योजना के तहत वही गांव चयनित होते हैं जहां अनुसूचित जाति (एससी) की आबादी 50 प्रतिशत से अधिक हो।

दक्षिण कन्नड़ और उडुपी के अधिकांश गांवों में एससी आबादी 10 से 25 हजार के बीच तो है, लेकिन प्रतिशत के लिहाज से 50 प्रतिशत से कम होने के कारण वे पात्र नहीं बन पाए।

सामाजिक कार्यकर्ताओं ने उठाए सवाल

स्थानीय सामाजिक कार्यकर्ताओं का मानना है कि केवल प्रतिशत आधारित मानदंड के कारण तटीय क्षेत्रों की अनदेखी करना उचित नहीं है। उनका कहना है कि यहां भी बड़ी संख्या में एससी/एसटी समुदाय के लोग रहते हैं, जिन्हें इस योजना का लाभ मिलना चाहिए।

उन्होंने सुझाव दिया कि जिलों में जहां एससी आबादी अधिक है, ऐसे गांवों को चयनित कर विकास कार्य किए जाने चाहिए।

क्या है आदर्श ग्राम योजना?

इस योजना के तहत अनुसूचित जाति बहुल गांवों का समग्र विकास किया जाता है। प्रत्येक चयनित गांव को 21 लाख रुपए की सहायता मिलती है, जिसमें 20 लाख रुपए विकास कार्यों और 1 लाख रुपए प्रशासनिक खर्च के लिए निर्धारित होते हैं।

शिक्षा, स्वास्थ्य, सडक़, पेयजल जैसी मूलभूत सुविधाओं के विकास के लिए ‘विलेज डेवलपमेंट प्लान’ तैयार किया जाता है और जिला स्तर पर इसकी निगरानी की जाती है।

यहां के गांव चयनित नहीं हो पाए

प्रधानमंत्री आदर्श ग्राम योजना एससी जनसंख्या के प्रतिशत के आधार पर लागू होती है। तटीय क्षेत्रों में यह मानदंड पूरा नहीं होने के कारण यहां के गांव चयनित नहीं हो पाए हैं।
सुरेश अडिग, प्रभारी अधिकारी, समाज कल्याण विभाग, दक्षिण कन्नड़

 

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