निजी पीएफ ट्रस्टों पर ब्याज सीमा
जोखिम आधारित लेखा जांच लागू
नई दिल्ली. केंद्र सरकार ने स्वयं के ट्रस्ट के माध्यम से कर्मचारियों का भविष्य निधि (पीएफ) संचालित करने वाली कंपनियों के लिए चार बड़े बदलाव लागू किए हैं। नए नियमों के तहत अब अनिवार्य वार्षिक लेखा परीक्षण की जगह “जोखिम आधारित लेखा जांच” प्रणाली लागू होगी, जबकि कर्मचारियों को दिए जाने वाले ब्याज पर भी सीमा तय कर दी गई है।
कर्मचारी भविष्य निधि संगठन की केंद्रीय न्यासी बोर्ड ने व्यापार सुगमता और कर्मचारियों के हितों को ध्यान में रखते हुए इन सरलीकृत दिशानिर्देशों को मंजूरी दी है। जल्द ही इसकी आधिकारिक अधिसूचना जारी होने की संभावना है।
देश में लगभग 1,000 से 1,200 बड़ी कंपनियां, सार्वजनिक उपक्रम और निजी संस्थान कर्मचारी भविष्य निधि अधिनियम 1952 की धारा 17 के तहत स्वयं के पीएफ ट्रस्ट संचालित कर रहे हैं। इन संस्थानों को कर्मचारियों को कर्मचारी भविष्य निधि संगठन के बराबर या उससे बेहतर सुविधाएं देना अनिवार्य होता है।
ईपीएफओ दर से अधिकतम 2 प्रतिशत अतिरिक्त ब्याज ही संभव
नए नियमों के अनुसार, छूट प्राप्त ट्रस्ट अब कर्मचारी भविष्य निधि संगठन द्वारा घोषित वार्षिक ब्याज दर से अधिकतम 2 प्रतिशत अधिक ब्याज ही दे सकेंगे। उदाहरण के तौर पर यदि ईपीएफओ ब्याज दर 8.25 प्रतिशत घोषित करता है, तो ट्रस्ट अधिकतम 10.25 प्रतिशत तक ब्याज दे सकेंगे।
सरकारी अधिकारियों के अनुसार कुछ ट्रस्ट सदस्य संख्या कम होने पर असामान्य रूप से 30 प्रतिशत से अधिक ब्याज घोषित कर रहे थे, जिससे वित्तीय असंतुलन पैदा हो रहा था।
जोखिम आधारित लेखा परीक्षण व्यवस्था
अब केवल उन्हीं संस्थाओं का लेखा परीक्षण किया जाएगा जिनमें अनियमितता या जोखिम की संभावना अधिक होगी। नियमों का सही पालन करने वाली कंपनियों को हर वर्ष अनिवार्य ऑडिट नहीं कराना पड़ेगा।
विलय के बाद भी बनी रहेगी छूट
नई व्यवस्था के तहत कंपनी विलय या अधिग्रहण के बाद भी छूट प्राप्त ट्रस्ट अपना दर्जा बनाए रख सकेंगे। साथ ही यदि कोई संस्था अपना छूट दर्जा समाप्त करना चाहती है, तो उसे कर्मचारियों के हितों की सुरक्षा के लिए समाचार पत्रों में सार्वजनिक सूचना प्रकाशित करनी होगी। इसके अलावा सभी खातों में राशि जमा होने, केवाईसी रहित और निष्क्रिय खातों को सुरक्षित रूप से कर्मचारी भविष्य निधि संगठन को हस्तांतरित करना भी अनिवार्य किया गया है।
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