कृषि को सक्षम, स्थिर और पर्यावरण अनुकूल बनाने में सस्टेनेबल इंजीनियरिंग तकनीकों की अहम भूमिका
किसानों को मृदा-जल संरक्षण तकनीकों की जानकारी देने पर जोर
सौर ऊर्जा आधारित तैरती सूक्ष्म सिंचाई प्रणाली से पानी और ऊर्जा की बचत
हुब्बल्ली। आइसीएआर-क्रिडा, हैदराबाद के पूर्व वैज्ञानिक के.एस. रेड्डी ने कहा कि जलवायु परिवर्तन के बढ़ते प्रभाव के बीच कृषि को अधिक सक्षम, स्थिर और पर्यावरण अनुकूल बनाने के लिए टिकाऊ इंजीनियरिंग तकनीकों को खेती से जोडऩा जरूरी है।
वे कृषि विश्वविद्यालय धारवाड़ के कृषि अभियांत्रिकी विभाग की ओर से सामुदायिक विज्ञान महाविद्यालय सभागार में आयोजित दिवंगत प्रो. आर.एफ. पाटील स्मृति व्याख्यान एवं इंजीनियर्स डे समारोह में सस्टेनेबल इंजीनियरिंग टेक्नोलॉजीज फॉर क्लाइमेट स्मार्ट एग्रीकल्चर’ विषय पर बोल रहे थे।
रेड्डी ने कहा कि किसानों में मृदा एवं जल संरक्षण तकनीकों को लेकर जागरूकता बढ़ाने की जरूरत है। खेती में सौर ऊर्जा आधारित तैरती सूक्ष्म सिंचाई प्रणाली जैसी तकनीकों की जानकारी किसानों तक पहुंचानी चाहिए। इस प्रणाली में सौर ऊर्जा की मदद से जलाशयों के पानी को प्रभावी ढंग से खेतों तक पहुंचाया जा सकता है। इससे पानी और ऊर्जा के कुशल उपयोग में मदद मिलती है।
अगली पीढ़ी की खेती के लिए जरूरी संरक्षण
कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए कृषि विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. एन.बी. प्रकाश ने कहा कि मृदा और जल संरक्षण के लिए खेतों में मेड निर्माण महत्वपूर्ण है। ऐसी तकनीकें आने वाली पीढ़ी की खेती के लिए भी मार्गदर्शक साबित होंगी।
उन्होंने कहा कि प्रो. आर.एफ. पाटील ने कृषि अभियांत्रिकी के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान दिया। उनके नाम पर आयोजित व्याख्यान श्रृंखला विद्यार्थियों, शिक्षकों और किसानों को नए विचारों एवं तकनीकों से परिचित कराने का अच्छा मंच है।
कार्यक्रम में शिक्षा निदेशक प्रो. एम.वी. मंजुनाथ, डीन प्रो. आर.वी. हेगड़े, प्रो. एम.एस. शिरहट्टी और प्रो. अनुराज बी. उपस्थित रहे।
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