1,200 करोड़ की योजना फाइलों में कैद, नहरों में दम तोड़ रही सिंचाईगाद से पटी वाणी विलास सागर बांध की नहर।

वाणी विलास सागर की जर्जर नहरों में झाडिय़ां-गाद और रिसाव से पानी की बर्बादी

29,984 एकड़ खेतों की प्यास बुझाने वाली परियोजना वित्त विभाग में अटकी

हिरियूर (चित्रदुर्ग)। बांध में पानी है, सिंचाई के लिए नहरें भी हैं, लेकिन किसानों के खेतों तक पर्याप्त पानी नहीं पहुंच रहा। करीब 118 साल पुराने वाणी विलास सागर बांध की नहरें झाडिय़ों, कांटेदार पौधों और गाद से पट चुकी हैं। पुराने जलद्वारों से पानी रिस रहा है। नतीजा यह कि कभी महज 15 दिन पानी छोडक़र सिंचाई करने वाली व्यवस्था में अब 45 दिन पानी बहाने के बावजूद किसानों को पर्याप्त जल नहीं मिल पा रहा। नहरों के आधुनिकीकरण और सूक्ष्म सिंचाई की 1,200 करोड़ रुपए की महत्वाकांक्षी योजना तैयार होने के बावजूद वित्त विभाग की मंजूरी नहीं मिलने से परियोजना फाइलों में अटकी है। पानी की कमी से जूझते किसानों के लिए अब नहरों की बदहाली सबसे बड़ी मुसीबत बन गई है।

मैसूरु के वाडियार शासकों द्वारा निर्मित वाणी विलास सागर बांध शुष्क क्षेत्र के किसानों के लिए जीवनरेखा है। लेकिन इसकी नहरों की लंबे समय से मरम्मत नहीं होने से सिंचाई व्यवस्था चरमरा गई है। बाईं और दाईं नहरों में झाडिय़ां और गाद पानी का प्रवाह रोक रही हैं। जगह-जगह बने पुराने जलद्वारों से रिसाव के कारण पानी खेतों तक पहुंचने से पहले ही बर्बाद हो रहा है। किसान अब केवल अधिक पानी छोडऩे की नहीं, बल्कि पूरी नहर व्यवस्था को नए सिरे से दुरुस्त करने की मांग कर रहे हैं।

29,984 एकड़ को पानी देने वाली व्यवस्था बदहाल

बांध की ऊपरी नहर 9.60 किलोमीटर लंबी है, जिससे 1,104 एकड़ क्षेत्र को सिंचाई सुविधा मिलती है। 46.40 किलोमीटर लंबी दाईं नहर के अधीन 13,909 एकड़ और 48 किलोमीटर लंबी बाईं नहर के अधीन 14,971 एकड़ क्षेत्र आता है। यानी कुल 29,984 एकड़ भूमि की सिंचाई इस व्यवस्था पर निर्भर है। इतनी बड़ी कृषि भूमि को पानी पहुंचाने वाली नहरों की दुर्दशा किसानों की चिंता बढ़ा रही है।

तालुक के आरनकट्टे गांव के किसान एस.बी. शिवकुमार का कहना है कि वाणी विलास सागर का पानी नहरों में ही बर्बाद हो रहा है, जबकि किसानों को उसका अपेक्षित लाभ नहीं मिल रहा। किसानों की मांग है कि पुराने जलद्वारों की जगह स्वचालित जलद्वार लगाए जाएं, ताकि रिसाव रुके और पानी का नियंत्रित वितरण हो सके।

विशेषज्ञों की रिपोर्ट तैयार, फिर भी परियोजना ठप

नहरों की समस्या दूर करने के लिए करीब चार वर्ष पहले विशेषज्ञों की टीम ने बांध क्षेत्र का दौरा कर किसानों से चर्चा की थी। इसके बाद एशियाई विकास बैंक, केंद्रीय जल आयोग और विश्वेश्वरय्या सिंचाई निगम ने नहरों के आधुनिकीकरण और सूक्ष्म सिंचाई की योजना तैयार की। विस्तृत रिपोर्ट राज्य सरकार को सौंपी गई। योजना के पीछे उद्देश्य था कि पानी का अधिक कुशल इस्तेमाल कर एक फसल के लिए उपलब्ध जल से दो फसलें लेने की संभावना बढ़ाई जाए।

लेकिन योजना को वित्त विभाग की मंजूरी नहीं मिलने से काम आगे नहीं बढ़ सका। अधिकारियों के बीच चर्चा है कि 1,200 करोड़ रुपए की परियोजना में राज्य सरकार को अपना हिस्सा देना है और धन की व्यवस्था नहीं होने से फाइल अटकी हुई है। इस देरी की कीमत किसान पानी की बर्बादी और सिंचाई की अनिश्चितता के रूप में चुका रहे हैं।

पूर्व विधायक ने दिया हस्तक्षेप का भरोसा

पूर्व विधायक के. पूर्णिमा ने कहा कि वह मुख्यमंत्री और जल संसाधन मंत्री से चर्चा कर वित्त विभाग में लंबित फाइल को मंजूरी दिलाने का प्रयास करेंगी।

सवाल यह है कि जब नहरों की खामियां चिन्हित हैं, विशेषज्ञों की रिपोर्ट तैयार है और आधुनिकीकरण की योजना भी मौजूद है, तो खेतों तक पानी पहुंचाने का इंतजाम अब तक क्यों नहीं हुआ? वाणी विलास सागर के किसानों को अब आश्वासन नहीं, नहरों की मरम्मत और परियोजना पर काम शुरू होने का इंतजार है।

 

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By Bharat Ki Awaz

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