‘भू गारंटी’ अटकी, जमीन की तलाश जारी‘भू गारंटी’ अटकी, जमीन की तलाश जारी

27 हजार परिवारों को भूखंड देने के लिए 850 एकड़ जमीन की दरकार

उत्तर कन्नड़ का 78 प्रतिशत हिस्सा वन क्षेत्र

4,012 एकड़ सरकारी भूमि पर अतिक्रमण

शहरों में भी जमीन का टोटा

कारवार (उत्तर कन्नड़)। भूखंडविहीन परिवारों को अपना आशियाना देने की कर्नाटक सरकार की ‘भू गारंटी’ योजना उत्तर कन्नड़ जिले में जमीन के संकट से जूझ रही है। करीब 27 हजार परिवारों को भूखंड देने के लिए कम से कम 850 एकड़ भूमि चाहिए, लेकिन जिले का 78 प्रतिशत हिस्सा वन क्षेत्र है और राजस्व भूमि सीमित। ऊपर से 4,012 एकड़ सरकारी जमीन पर अतिक्रमण है। ऐसे में योजना की घोषणा के बाद अब प्रशासन के सामने सबसे बड़ी चुनौती जमीन जुटाने की है।

राज्य मंत्रिमंडल ने 9 सितंबर को पहले चरण में प्रत्येक जिले में कम से कम 50 हजार भूखंडविहीन परिवारों को 30 गुणा 40 फुट के भूखंड देने का निर्णय लिया था। उत्तर कन्नड़ में प्रारंभिक अनुमान के अनुसार करीब 27 हजार परिवार इसके दायरे में हैं। हालांकि, लाभार्थियों की वास्तविक संख्या अभी तय नहीं है। वर्ष 2024 में किए गए सर्वेक्षण की अंतिम रिपोर्ट अब तक नहीं मिली है।

सरकारी जमीन पर कब्जा, विकल्प सीमित

राजस्व विभाग के एक वरिष्ठ अधिकारी के अनुसार, जिले में कुल 36,926 एकड़ सरकारी जमीन है। इसमें से 4,012 एकड़ पर वर्ष 2005 से पहले ही अतिक्रमण हो चुका था। नियमानुसार, शहरों से पांच किलोमीटर के दायरे में स्थित सरकारी भूमि सार्वजनिक योजनाओं के लिए सुरक्षित रखी जानी चाहिए, लेकिन कई जगहों पर कब्जे होने से जमीन की उपलब्धता प्रभावित हुई है।

शहरों में भी भूखंडों का संकट

वर्ष 2018 के सर्वेक्षण में जिले के शहरी स्थानीय निकाय क्षेत्रों में करीब पांच हजार भूखंडविहीन परिवार चिह्नित किए गए थे। परिवारों के विभाजन और विस्तार के चलते अब यह संख्या 10 हजार से अधिक होने की आशंका है। लेकिन शहरों में सरकारी जमीन बेहद कम है, जबकि कुछ स्थानों पर उपलब्ध ही नहीं है।

जिला पंचायत के योजना अधिकारी सोमशेखर मेस्ता के अनुसार, प्रारंभिक आंकड़े वर्ष 2018 में प्रधानमंत्री आवास योजना के लिए किए गए सर्वेक्षण पर आधारित हैं। वर्ष 2024 में भी सर्वेक्षण हुआ, लेकिन उसकी अंतिम रिपोर्ट लंबित है। इससे लाभार्थियों की संख्या में बदलाव संभव है।

जरूरी जमीन जुटाना बड़ी चुनौती

भूखंडों के लिए जमीन की पहचान का काम जारी है। अब योजना का भविष्य इस बात पर निर्भर है कि सीमित भूमि और अतिक्रमण के बीच प्रशासन 27 हजार परिवारों के लिए जरूरी जमीन कैसे और कब तक जुटाता है।
–के. लक्ष्मीप्रिया, जिलाधिकारी, उत्तर कन्नड़

 

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By Bharat Ki Awaz

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