दूसरी फसल पर संकट, किसानों में गहरी चिंता
कोप्पल. तुंगभद्रा जलाशय के छह क्रस्ट गेट मरम्मताधीन होने से जलाशय में पर्याप्त पानी भंडारण संभव नहीं हो पा रहा है। इस मानसून में अब तक करीब 130 टीएमसी पानी बहकर निकल गया, जिससे कोप्पल, विजयनगर, बल्लारी और रायचूर जिलों के साथ-साथ आंध्र व तेलंगाना के किसानों की दूसरी फसल पर संकट गहराने लगा है।
विशेषज्ञों का कहना है कि पिछले साल टूटे 19वें गेट की अस्थायी मरम्मत के बाद इस बार 11, 18, 20, 24, 27 और 28वें गेट दुरुस्ती में हैं। दबाव में खोला तो गेट टूट सकता है।
जलाशय की कुल क्षमता 105 टीएमसी है, मगर गेटों की खराबी से अधिक पानी छोड़ा जा रहा है। किसानों को डर है कि इस बार सिर्फ एक ही फसल के लिए पानी उपलब्ध होगा।
सभी गेट बदलने की जरूरत
विशेषज्ञों की रिपोर्ट के अनुसार तुंगभद्रा जलाशय के छह गेट मरम्मताधीन हैं। इन गेटों से पूरी तरह पानी छोड़ा जाना संभव नहीं है। इसी कारण बाकी गेटों से अधिक मात्रा में पानी छोड़ा जा रहा है। मैं स्वयं जलाशय का दौरा कर चुका हूं और इस विषय पर विशेषज्ञों से चर्चा भी की है। जलाशय के सभी गेट बदलने की आवश्यकता है।
–शिवराज तंगडगी, अध्यक्ष, आईसीसी सिंचाई सलाहकार समिति

