मुख्यमंत्री सिध्दरामय्या ने की अपील
हुब्बल्ली. मुख्यमंत्री सिध्दरामय्या ने कहा कि कृषि विश्वविद्यालयों को केवल शोध तक सीमित न रहकर उस शोध के लाभ सीधे किसानों तक पहुंचाने चाहिए।
वे सोमवार शाम को धारवाड़ के कृषि विश्वविद्यालय के किसान ज्ञान विकास केंद्र में आयोजित कृषि मेले के उद्घाटन समारोह को संबोधित कर रहे थे।
उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालयों को ‘लैब टू लैंड’ के साथ-साथ ‘लैंड टू लैब’ पर भी ध्यान देना चाहिए। कृषि विभाग और कृषि विश्वविद्यालय किसानों को जोडऩे वाले सेतु की तरह कार्य करें।
मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य की 60 प्रतिशत भूमि वर्षा पर और 40 प्रतिशत भूमि सिंचाई पर आधारित है। विश्वविद्यालयों का दायित्व है कि वे किसानों को मार्गदर्शन दें कि किस क्षेत्र में कौन-सी फसल उपयुक्त होगी। उन्होंने किसानों से अधिक से अधिक मोटे अनाज (सिरिधान्य) उगाने की अपील की और कहा कि ये अनाज स्वास्थ्य संरक्षण के लिए लाभकारी हैं। कृषि वैज्ञानिकों को इनके महत्व को किसानों तक पहुंचाना चाहिए।
फसल नुकसान और राहत
मुख्यमंत्री ने कहा कि इस बार खरीफ मौसम में राज्य की 80 लाख हेक्टेयर भूमि पर बुवाई हुई थी, परन्तु भारी बारिश के कारण लगभग 5 लाख हेक्टेयर में फसलें चौपट हुईं। उन्होंने जिलाधिकारियों और सीईओ को संयुक्त सर्वे कर रिपोर्ट देने का निर्देश दिया है।
धारवाड़ जिले की रिपोर्ट पहले ही सौंपी जा चुकी है जिसमें लगभग 97,000 हेक्टेयर क्षेत्र में फसल क्षति का उल्लेख है। उन्होंने आश्वासन दिया कि प्रभावित किसानों के खातों में शीघ्र ही मुआवजा जमा किया जाएगा।
मुख्यमंत्री ने घोषणा की कि बेण्णिहल्ला परियोजना के विकास के लिए 200 करोड़ रुपए स्वीकृत किए गए हैं और टेंडर की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है।
गारंटी और विकास योजनाओं पर बड़ा खर्च
इस अवसर पर जिला प्रभारी मंत्री संतोष लाड ने कहा कि राज्य सरकार गारंटी योजनाओं पर 55,000 करोड़ रुपए, विकास कार्यों पर 83,000 करोड़ रुपए, शिक्षा पर 65,000 करोड़ रुपए और सामाजिक सुरक्षा योजनाओं पर 1.20 लाख करोड़ रुपए खर्च कर रही है।
विधान परिषद के सभापति बसवराज होरट्टी ने कहा कि कृषि विश्वविद्यालयों को ऐसा काम करना चाहिए कि किसान आत्महत्या न करें। अनुसंधान सीधे किसानों तक पहुंचे और खेती लाभदायक बने।
अतिरिक्त खरीद केंद्र की घोषणा
कृषि मंत्री एन. चलुवरायस्वामी ने कहा कि एमएसपी (न्यूनतम समर्थन मूल्य) पर खरीदी के लिए किसानों का पंजीकरण सितंबर अंत से शुरू होगा और अक्टूबर-नवंबर से खरीदी प्रारंभ होगी। नवणे और उद्लू जैसे सिरिधान्य भी रागी के मूल्य पर खरीदे जाएंगे। धारवाड़ जिले में अतिरिक्त खरीद केंद्र खोलने की मंज़ूरी दी जाएगी।
कार्यक्रम में मुख्यमंत्री सिध्दरामय्या ने ‘कृषिधारे’ मोबाइल ऐप का शुभारंभ किया।
श्रेष्ठ कृषक सम्मान
इस अवसर पर 14 किसानों को जिला स्तरीय श्रेष्ठ कृषक पुरस्कार प्रदान किए गए।
सम्मानित महिलाएं
रेणुका बोझण्णवर, बसम्मा चेन्नूर, सुधा मूशप्पनवर, कृष्णाबाई साळुंके, संगीता कांती, कमला कोडेकर, शिवलीला हित्तलमनी।
सम्मानित पुरुष
रामनगौड़ा पाटील, राजीव दानप्पनवर, गरुडप्पा जंतली, निंगनगौड़ा पाटील, अर्जुन गलगली, सुब्राय हेगड़े, शौकत अली लम्बूनवर।
सांस्कृतिक आकर्षण
कृषि मेले में सांस्कृतिक कार्यक्रम भी हुए। एक व्यक्ति ने सांस्कृतिक कला दल के साथ सेल्फी ली, वहीं विश्वविद्यालय परिसर के उद्यान में लम्बानी महिलाओं ने पारंपरिक नृत्य प्रस्तुत किया।
कार्यक्रम में मौजूद प्रमुख अतिथि
कार्यक्रम में कृषि विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. पी.एल. पाटील, विधानसभा में सत्तारूढ़ दल के मुख्य सचेतक अशोक पट्टण, विधायक एन.एच. कोनरेड्डी, प्रसाद अब्बय्या, विजयानंद काशप्पनवर, यासिर अहमद पठान, बसवराज शिवन्ननवर, श्रीनिवास माने, जी.एस. पाटील, बाल विकास अकादमी के अध्यक्ष संगमेश बबलेश्वर, जिलाधिकारी दिव्य प्रभु, जिला पंचायत सीईओ भुवनेश पाटील सहित कई गणमान्य व्यक्ति उपस्थित थे।

