केंद्र सरकार की कठपुतली बनने का आरोप
संयुक्त अधिवेशन पर उठे सवाल
हुब्बल्ली. राज्यपाल थावरचंद गहलोत के आचरण को लेकर कर्नाटक की राजनीति में नया विवाद खड़ा हो गया है। सरकार के मुख्य सचेतक एवं विधान परिषद सदस्य सलीम अहमद ने आरोप लगाया है कि राज्यपाल संविधान की मर्यादाओं के खिलाफ काम कर रहे हैं और केंद्र सरकार के इशारे पर “कठपुतली” की तरह व्यवहार कर रहे हैं।
संयुक्त अधिवेशन पर तीखी टिप्पणी
शनिवार को पत्रकारों से बातचीत में सलीम अहमद ने कहा कि विधानसभा-विधान परिषद के संयुक्त अधिवेशन में राज्यपाल का रवैया पूरी तरह असंवैधानिक रहा। संवैधानिक परंपरा के अनुसार राज्यपाल को सरकार की नीतियों और योजनाओं पर केंद्रित भाषण देना चाहिए, लेकिन उन्होंने इस परंपरा को दरकिनार कर दिया।
जनता के साथ अन्याय
सलीम अहमद ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि संवैधानिक पद पर बैठे व्यक्ति के लिए भावनाओं की कोई जगह नहीं होती। उन्हें अपने व्यक्तिगत विचारों को अलग रखकर केवल संविधान के अनुसार कर्तव्य निभाना चाहिए। राज्यपाल के इस रवैए से जनता के साथ अन्याय हुआ है।
कानूनी विकल्पों पर विचार
उन्होंने कहा कि सरकार इस मामले को गंभीरता से ले रही है। मुख्यमंत्री सिद्धरामय्या पहले ही राज्यपाल के आचरण की निंदा कर चुके हैं और कानूनी विशेषज्ञों से चर्चा भी की है।
खतरनाक परंपरा की चेतावनी
सलीम अहमद ने चेतावनी दी कि राज्य के इतिहास में ऐसी घटना पहले कभी नहीं हुई। यदि इसे रोका नहीं गया तो यह एक खतरनाक परंपरा की शुरुआत होगी, जिसे किसी भी सूरत में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
राज्यपाल के आचरण को लेकर यह विवाद अब राज्य की राजनीति में नई बहस और टकराव का कारण बनता जा रहा है।

