6वीं से 9वीं तक के विद्यार्थियों के सीखने के स्तर के आधार पर बनेगी रणनीति
शैक्षणिक गुणवत्ता सुधार पर जोर
हुब्बल्ली. कर्नाटक में शिक्षा व्यवस्था को अधिक प्रभावी और परिणामोन्मुख बनाने की दिशा में राज्य सरकार ने महत्वपूर्ण पहल की है। आगामी शैक्षणिक वर्ष से प्रत्येक जिले के लिए अलग-अलग शैक्षणिक कार्ययोजना लागू की जाएगी, जो 6वीं से 9वीं कक्षा के विद्यार्थियों के सीखने के स्तर के आधार पर तैयार की जाएगी।
अब सिर्फ एसएसएलसी नहीं, निचली कक्षाओं पर भी फोकस
अब तक शिक्षा विभाग मुख्य रूप से 10वीं (एसएसएलसी) के परिणाम सुधार पर ध्यान केंद्रित करता था। लेकिन नई व्यवस्था के तहत शुरुआती कक्षाओं में ही विद्यार्थियों की शैक्षणिक स्थिति का आकलन कर सुधारात्मक कदम उठाए जाएंगे। इससे समय रहते कमजोरियों को दूर करने में मदद मिलेगी।
सैट्स सॉफ्टवेयर से होगा सटीक विश्लेषण
राज्य में वर्तमान शैक्षणिक वर्ष में 6वीं से 9वीं तक के विद्यार्थियों के लिए द्वितीय समेकित मूल्यांकन परीक्षा आयोजित की जा रही है। इन परीक्षाओं के अंक सैट्स (स्टूडेंट अचीवमेंट ट्रैकिंग सिस्टम) में दर्ज किए जाएंगे।
पहले केवल ग्रेड दर्ज होते थे, जिससे सटीक मूल्यांकन संभव नहीं था। अब अंकों के आधार पर विद्यार्थियों की वास्तविक सीखने की क्षमता का गहन विश्लेषण किया जा सकेगा।
10वीं से पहले ही पता चलेगी क्षमता
इस नई प्रणाली से विद्यार्थियों की शैक्षणिक स्थिति का स्पष्ट चित्र 10वीं कक्षा से पहले ही सामने आ जाएगा। इससे स्कूलों और विभाग को समय रहते सुधारात्मक उपाय लागू करने का अवसर मिलेगा।
स्कूल स्तर पर नवाचार भी शामिल
नई कार्ययोजना में कई नवाचार जैसे शिक्षक-विद्यार्थी व्हाट्सएप समूह, क्विज और डिजिटल लर्निंग टूल्स का उपयोग, कमजोर स्कूलों को अधिकारियों द्वारा गोद लेना, मनोवैज्ञानिकों द्वारा प्रेरणा सत्र, परीक्षा तनाव प्रबंधन के लिए हेल्पलाइन, सुधार के लिए विशेष कदम, अतिरिक्त कक्षाएं (स्कूल से पहले/बाद), ‘पासिंग’ और ‘स्कोरिंग’ पैकेज, कठिन विषयों पर विशेष ध्यान, विषय विशेषज्ञों की नियुक्ति, पुराने प्रश्नपत्रों का विश्लेषण, डिजिटल माध्यम से श्रेष्ठ शिक्षकों के लेक्चर शामिल किए गए हैं।
शैक्षणिक गुणवत्ता में व्यापक सुधार संभव
हम विद्यार्थियों के अंकों का वैज्ञानिक विश्लेषण कर उनकी सीखने की कमियों की पहचान करेंगे। इसके आधार पर शिक्षा विभाग जिला स्तर पर प्रभावी कार्ययोजना तैयार करेगा, जिससे शैक्षणिक गुणवत्ता में व्यापक सुधार संभव होगा।
–एचएन. गोपालकृष्ण, निदेशक, राज्य शिक्षा अनुसंधान एवं प्रशिक्षण संस्थान
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