वचनानंद स्वामी ने कहा
हुब्बल्ली. पंचमसाली हरिहरपीठ के वचनानंद स्वामी ने कहा कि शहर के नेहरू मैदान में आयोजित वीरशैव-लिंगायत सम्मेलन केवल एक माइक्रो-समुदाय सम्मेलन के रूप में हुआ। इसमें लगभग सात हजार लोग ही शामिल हुए और कोई निर्णायक निर्णय नहीं लिया गया। सम्मेलन की स्थिति अस्पष्ट रही। इसके अलावा, पंचमसाली समाज का इससे कोई संबंध नहीं है।
शहर में शनिवार को पत्रकारों से बातचीत करते हुए वचनानंद स्वामी ने कहा कि सामाजिक, आर्थिक और सर्वेक्षण कार्य शुरू होने के दृष्टिगत, पंचमसालियों को धर्म और जाति कॉलम में क्या भरना है, इसे लेकर घर-घर जाकर स्टिकर लगाने का अभियान शुरू किया गया है।
उन्होंने कहा कि वीरशैव-लिंगायत एकता सम्मेलन में लिंगायत स्वामी शामिल नहीं हुए। केवल पुरोहितों को भगवा वस्त्र पहनाकर मंच पर बैठाया गया। सम्मेलन में कोई निर्णय नहीं लिया गया क्योंकि उसमें स्पष्टता नहीं थी। हमारे पास स्पष्टता है। पंचमसालियों को धर्म कॉलम में “हिंदू” और जाति कॉलम में “लिंगायत पंचमसाली” भरने की जानकारी दी जा रही है।
वचनानंद स्वामी ने कहा कि 22 सितंबर से सर्वेक्षण शुरू हो रहा है। 16 जिलों में 30 स्वामी समाज के लोगों में जागरूकता फैलाने का कार्य कर रहे हैं। स्टिकर में केवल दो स्वामीयों के चित्र शामिल हैं, क्योंकि अन्य विवाद में हैं। धर्म कॉलम में “हिंदू” और जाति कॉलम में “लिंगायत पंचमसाली” लिखने की बात समाज तक पहुंचाई जा रही है।
पंचमसाली समाज और सर्वेक्षण पर जोर
वचनानंद स्वामी ने कहा कि सामाजिक-शैक्षणिक सर्वेक्षण को जल्दबाजी में करने से सरकार केवल भ्रम फैलाएगी। इसी कारण से कांतराज आयोग की रिपोर्ट को खारिज किया गया था। अब सर्वेक्षण वैज्ञानिक तरीके से होना चाहिए।
उन्होंने कहा कि पत्रिकाओं में विज्ञापन देकर सार्वजनिक आपत्तियों को आमंत्रित करना चाहिए। उसके बाद कानूनी विशेषज्ञों की समिति बनाकर समाज के वरिष्ठों के साथ चर्चा करके सर्वेक्षण करना चाहिए। यह पूरे 7 करोड़ कन्नड़ भाषी लोगों के भविष्य का प्रश्न है। मुख्यमंत्री और संबंधित मंत्रियों से गड़बड़ी दूर करने की अपील की गई है।
जाति सूची में भ्रम जारी
वचनानंद स्वामी ने कहा कि हिंदू पिछड़ा वर्ग आयोग ने जाति सूची में कई गड़बडिय़ां छोड़ी हैं। इसमें लिंगायत क्रिश्चियन, मडिवाल क्रिश्चियन, जंगम क्रिश्चियन, ओक्कलिग क्रिश्चियन जैसी त्रुटियां हैं। अलग-अलग उपसमुदायों को अलग कोड दिए गए हैं।
उन्होंने कहा कि हुब्बल्ली में शुक्रवार को हुए एकता सम्मेलन का पंचमसाली समाज से कोई संबंध नहीं था। विधायक विजयानंद काशप्पनवर उस सम्मेलन में शामिल हुए, जबकि पंचमसाली पीठ की बातों को समाज के लोग ही सुनें।
पंचमसाली समाज का निर्णय स्पष्ट
यह केवल छोटे समुदाय का सम्मेलन था। इसमें केवल सात हजार लोग और कुछ ही स्वामी शामिल थे। पुरोहितों को भगवा वस्त्र पहनाकर बैठाया गया। सम्मेलन में कोई निर्णय नहीं लिया गया।
सभी तालुक और जिला केंद्रों में समाज के प्रमुख लोग जागरूकता फैलाएंगे और फिर 16 जिलों का दौरा किया जाएगा। हमारे समाज के तीन पीठों ने एकमत से निर्णय लिया है और सभी नेता इसे स्वीकार कर चुके हैं।

