सामाजिक सुरक्षा योजनाओं में अधिक पंजीकरण करेंजिला पंचायत के नेत्रावती सभागार में आयोजित जिला स्तरीय लीड बैंक प्रगति समीक्षा एवं बैंकिंग विकास बैठक को संबोधित करते दक्षिण कन्नड़ जिला पंचायत के मुख्य कार्यकारी अधिकारी नरवाडे विनायक कारभारी।

बैंकों को शहर क्षेत्रों पर ध्यान देने के निर्देश

मेंगलूरु. दक्षिण कन्नड़ जिला पंचायत के मुख्य कार्यकारी अधिकारी नरवाडे विनायक कारभारी ने कहा कि प्रधानमंत्री जीवन ज्योति बीमा योजना (पीएमजेजेबीवाई) एवं प्रधानमंत्री सुरक्षा बीमा योजना (पीएमएसबीवाई) जैसी केंद्र सरकार की सामाजिक सुरक्षा योजनाओं में अधिक से अधिक लोगों का पंजीकरण सुनिश्चित करने के लिए बैंकों को शहर क्षेत्रों पर विशेष ध्यान केंद्रित करना चाहिए।

वे जिला पंचायत के नेत्रावती सभागार में आयोजित जिला स्तरीय लीड बैंक प्रगति समीक्षा एवं बैंकिंग विकास बैठक की अध्यक्षता कर बोल रहे थे।

उन्होंने नगर निगम आयुक्त और जिला शहरी विकास कोष योजना निदेशक को भी निर्देश दिया कि वे प्रत्येक वार्ड में लाभार्थियों के पंजीकरण के लिए बैंकों को सहयोग प्रदान करें।

योजनाओं की स्थिति

लीड बैंक प्रबंधक कविता शेट्टी ने कहा कि चालू वित्तीय वर्ष की तिमाही में पीएमजेजेबीवाई योजना के तहत 14,575 पंजीकरण, पीएमएसबीवाई योजना में 31,633 पंजीकरण, अटल पेंशन योजना (एपीवाई) में 7,025 पंजीकरण, पीएम स्वनिधि योजना के अंतर्गत प्रथम किस्त में 840, द्वितीय किस्त में 994 तथा तृतीय किस्त में 875 स्वीकृतियां प्रदान की गईं। इसके अलावा मुद्रा योजना के तहत 16,664 खातों को कुल 223.24 करोड़ रुपए का ऋण वितरित किया गया। प्रधानमंत्री जनधन योजना के अंतर्गत पिछली तिमाही में 8,075 नए बचत खाते खोले गए हैं।

आवास एवं शिक्षा ऋण पर जोर

जिला पंचायत सीईओ ने कहा कि प्रधानमंत्री आवास योजना के अंतर्गत लाभार्थियों को 1.20 लाख से 1.50 लाख रुपए तक की आर्थिक सहायता मिलती है, परन्तु मकान निर्माण के लिए यह पर्याप्त नहीं है। इसलिए बैंकों को लाभार्थियों को अतिरिक्त गृह ऋण प्रदान करने पर विशेष ध्यान देना चाहिए।

कविता शेट्टी ने बताया कि प्राथमिकता क्षेत्र के अंतर्गत शिक्षा क्षेत्र में 22.08 करोड़ रुपए तथा आवास योजना में 74.22 करोड़ रुपए वितरित किए गए हैं। इस प्रकार तिमाही लक्ष्य 167.78 करोड़ रुपए का 44.33 प्रतिशत पूरा किया गया है।

ऋण वितरण में विलंब

केनरा बैंक की डीजीएम लता पी. कुरुप ने कहा कि ई-खाता जारी करने में विलंब और लाल पत्थरों की कमी जैसी समस्याओं के कारण बैंकों द्वारा स्वीकृत गृह ऋण का वितरण देर से हो रहा है परन्तु सामान्यत: दूसरी तिमाही में शिक्षा ऋण वितरण में वृद्धि होती है।

आरबीआई के एजीएम अरुण कुमार ने ग्राहकों के पुन: ई-केवाईसी पर ध्यान केंद्रित करने की आवश्यकता बताई। नाबार्ड की डीडीएम संगीता कर्त भी इस अवसर पर उपस्थित थीं।

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By Bharat Ki Awaz

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