2025 रिपोर्ट में सकारात्मक संकेत; 66.5 प्रतिशत उपयोग

पुनर्भरण 19.28 बीसीएम तक पहुंचा

हुब्बल्ली. राज्य में भूजल उपयोग में कमी और पुनर्भरण क्षमता में वृद्धि दर्ज की गई है। वर्ष 2025 की ‘भूजल मूल्यांकन रिपोर्ट’ के अनुसार, कर्नाटक में औसतन 66.5 प्रतिशत भूजल का उपयोग हो रहा है, जो पिछले वर्ष की तुलना में कम है। वहीं, भूजल पुनर्भरण बढक़र 19.28 बिलियन क्यूबिक मीटर (बीसीएम) तक पहुंच गया है।

यह रिपोर्ट भूजल विकास विभाग की सचिव बी.के. पवित्रा ने बुधवार को विकास सौधा में लघु सिंचाई मंत्री एनएस. भोसराजु को सौंपी। मंत्री भोसराजु ने कहा कि बेहतर वर्षा, जल संरक्षण नीतियों और जनजागरूकता के कारण यह सुधार संभव हुआ है। उन्होंने ‘नीर इद्दरे नाले’ (पानी है तो कल है) कार्यक्रम को और प्रभावी ढंग से लागू करने की बात कही।

उपयोग में कमी, संरक्षण को बढ़ावा

रिपोर्ट के अनुसार, 2024 में जहां भूजल उपयोग 68.44 प्रतिशत था, वह 2025 में घटकर 66.49 प्रतिशत रह गया है। इससे स्पष्ट है कि राज्य में जल संरक्षण की दिशा में ठोस कदम उठाए गए हैं।

पुनर्भरण में उल्लेखनीय वृद्धि

भूजल पुनर्भरण 18.74 बीसीएम से बढक़र 19.28 बीसीएम हो गया है। जल संरक्षण संरचनाओं के माध्यम से पुनर्भरण में 29 प्रतिशत से अधिक की वृद्धि दर्ज की गई है। राज्यभर में ऐसे कार्यों की संख्या 3.15 लाख से बढक़र 3.94 लाख हो गई है।

कई तालुक ‘सुरक्षित’ श्रेणी में

रिपोर्ट में बताया गया है कि 11 तालुकों में स्थिति सुधरी है। चामराजनगर ‘अति-उपयोग’ सूची से बाहर आकर ‘निर्णायक’ श्रेणी में आ गया है। वहीं, अथणी, चन्नपट्टण, मोलकालमूर, राणेबेन्नूर, सवणूर और शिग्गावी जैसे तालुक अब ‘सुरक्षित’ श्रेणी में शामिल हो गए हैं। वर्तमान में 145 तालुक पूरी तरह सुरक्षित माने गए हैं।

बेंगलूरु में चिंता बरकरार

हालांकि, रिपोर्ट में यह भी सामने आया है कि बेंगलूरु शहर सहित 44 तालुकों में अभी भी भूजल का अत्यधिक दोहन हो रहा है। इन्हें ‘अतिब्यवहार’ क्षेत्र के रूप में चिन्हित किया गया है।

सरकार की दीर्घकालिक योजना

मंत्री एनएस. भोसराजु ने कहा कि भूजल उपयोग में कमी और पुनर्भरण में वृद्धि हमारी जल स्थिरता के प्रति प्रतिबद्धता को दर्शाती है। झीलों को भरने और सतही जल के उपयोग को बढ़ावा देने से दीर्घकालिक जल सुरक्षा सुनिश्चित की जा रही है।

रिपोर्ट में उल्लेख किया गया है कि घरेलू उपयोग के लिए भूजल पर निर्भरता में कमी आई है, जिससे भविष्य में जल संकट को कम करने में मदद मिलेगी।

रिपोर्ट के प्रमुख बिंदु (2025 भूजल मूल्यांकन रिपोर्ट)

राज्य में भूजल पर निर्भरता में कमी दर्ज
कुल भूजल उपयोग घटकर 66.49 प्रतिशत (औसतन 66.5 प्रतिशत)
भूजल पुनर्भरण बढक़र 19.28 बीसीएम तक पहुंचा
जल संरक्षण कार्यों में वृद्धि—संख्या 3.15 लाख से बढक़र 3.94 लाख
जल संरचनाओं से पुनर्भरण में लगभग 29 प्रतिशत की बढ़ोतरी
11 तालुकों में भूजल स्थिति में सुधार
चामराजनगर ‘अति व्यवहार’ से निकलकर ‘निर्णायक’ श्रेणी में शामिल
अथणी, चन्नपट्टण, मोलकालमूर, राणेबेन्नूर, सवणूर, शिग्गावी अब ‘सुरक्षित’ श्रेणी में
राज्य के 145 तालुक पूरी तरह सुरक्षित घोषित
घरेलू उपयोग में भूजल निर्भरता में कमी (0.58 प्रतिशत गिरावट)
जल जीवन मिशन के कारण सतही जल उपयोग में वृद्धि
‘नीर इद्दरे नाले’ कार्यक्रम लागू करने की योजना
तालाब भरने की योजनाओं से 4.48 प्रतिशत अधिक पुनर्भरण

चिंताजनक तथ्य

बेंगलूरु शहर सहित 44 तालुक (18.99 प्रतिशत) में अत्यधिक भूजल दोहन
11 तालुक ‘अतिसंवेदनशील/अपायकारी’ श्रेणी में
36 तालुक ‘अर्ध-अपायकारी’ स्थिति में

भूजल गुणवत्ता संबंधी स्थिति

17 तालुक में लवणीय समस्या
41 तालुक में नाइट्रेट की अधिकता
15 तालुक में फ्लोराइड की समस्या
13 तालुक में यूरेनियम की मौजूदगी

 

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By Bharat Ki Awaz

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