हजारों गांव जल संकट की चपेट में
किसानों पर बढ़ा दबाव
सरकार ने टैंकर और बोरवेल से शुरू की आपूर्ति
हुब्बल्ली. राज्य में बढ़ती भीषण गर्मी अब जल संकट का रूप लेती जा रही है। राज्य स्तरीय मौसम निगरानी समिति की ताजा रिपोर्ट के अनुसार, इस गर्मी में 207 तालुकों में पेयजल संकट गहराने की आशंका है, जबकि 60 तालुक पहले ही गंभीर पानी की कमी झेल रहे हैं।
हजारों गांवों में गहराया संकट
रिपोर्ट के मुताबिक, 2,258 ग्राम पंचायतों को जल संकट प्रभावित क्षेत्र घोषित किया गया है। इनमें से 212 गांवों की स्थिति अत्यंत गंभीर बताई जा रही है। उत्तर कन्नड़, बेलगावी, कलबुर्गी और तुमकूरु जिलों के कई तालुक सबसे ज्यादा प्रभावित हैं।
ग्राम स्तर पर कलबुर्गी (180), उत्तर कन्नड़ (170), हावेरी (138), मंड्या (130) और बेलगावी (126) जिलों में पानी की किल्लत अधिक देखी जा रही है।
सरकार के राहत प्रयास
स्थिति से निपटने के लिए राज्य सरकार ने 60 पानी के टैंकर तैनात किए हैं। साथ ही 270 निजी बोरवेल के जरिए 246 गांवों में पेयजल आपूर्ति की जा रही है। स्थानीय प्रशासन भी हालात पर नजर बनाए हुए है।
बढ़ती गर्मी और हीटवेव का खतरा
मौसम विशेषज्ञों के अनुसार मार्च से मई के बीच राज्य के अधिकांश हिस्सों में सामान्य से अधिक तापमान दर्ज किया जाएगा। कोलार, चिक्कबल्लापुर, बेंगलूरु ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में 3 से 6 दिनों तक लू चलने की संभावना जताई गई है।
खेती पर मंडराया संकट
यदि जुलाई-अगस्त में मानसून कमजोर रहता है, तो कृष्णा और कावेरी नदी क्षेत्र में लंबे सूखे का खतरा बढ़ सकता है। इससे धान, गेहूं, गन्ना और सब्जियों की फसलों को भारी नुकसान हो सकता है, जिससे किसानों की चिंता बढ़ गई है।
स्वास्थ्य और पर्यावरण पर असर
जल संकट के चलते वन्यजीवों के मानव बस्तियों की ओर आने की आशंका भी बढ़ रही है। वहीं, पानी की कमी से जलजनित बीमारियों का खतरा भी बढ़ सकता है।
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