दावणगेरे-बागलकोट उपचुनाव में गुटबाजी थमी
नेताओं की एकजुट रणनीति बनी बड़ी ताकत
हुब्बल्ली. दावणगेरे दक्षिण और बागलकोट विधानसभा उपचुनाव के नतीजे भले ही 4 मई को सामने आएंगे, लेकिन उससे पहले ही भाजपा खेमे में राहत और संतोष का माहौल है। इसकी वजह चुनावी नतीजे नहीं, बल्कि पार्टी के भीतर दिखाई दी अभूतपूर्व एकजुटता है।
गुटबाजी पर लगा विराम
लंबे समय से “मकान के तीन दरवाजे” जैसी स्थिति में रही राज्य भाजपा में इस बार उपचुनाव के दौरान समन्वय और सामंजस्य देखने को मिला। उम्मीदवार चयन से लेकर प्रचार तक कहीं भी आंतरिक मतभेद खुलकर सामने नहीं आए, जिससे दिल्ली आलाकमान ने भी राहत की सांस ली।
साथ दिखे बड़े नेता
चुनाव प्रचार के दौरान बीएस. येडियूरप्पा और जीएम. सिद्देश्वर जैसे नेताओं ने अपने पुराने मतभेदों को किनारे रखकर एकजुटता का संदेश दिया। दावणगेरे में उम्मीदवार के नामांकन से लेकर प्रचार तक दोनों नेताओं की संयुक्त मौजूदगी पार्टी कार्यकर्ताओं के लिए बड़ा संकेत रही।
आलाकमान क्यों खुश?
पार्टी के शीर्ष नेतृत्व के लिए सबसे बड़ी राहत यह रही कि राज्य के नेताओं ने बिना किसी विवाद के चुनाव को संगठित तरीके से लड़ा। प्रल्हाद जोशी, सीटी. रवि, आर. अशोक और बीवाई. विजयेंद्र समेत कई नेताओं ने समन्वय के साथ प्रचार किया, जिससे कार्यकर्ताओं का उत्साह भी बढ़ा।
कार्यकर्ताओं में बढ़ा भरोसा
नेताओं के बीच बेहतर तालमेल का असर जमीनी स्तर पर भी दिखा। कार्यकर्ताओं ने इसे सकारात्मक बदलाव मानते हुए पार्टी के भविष्य के लिए अच्छा संकेत बताया।
कांग्रेस में दिखा उलट परिदृश्य
जहां भाजपा में एकजुटता नजर आई, वहीं सत्तारूढ़ कांग्रेस में खासकर दावणगेरे क्षेत्र में कुछ आंतरिक मतभेद सामने आए, जिसने भाजपा को मनोवैज्ञानिक बढ़त दी।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि भले ही चुनाव परिणाम कुछ भी हो, लेकिन भाजपा में दिखी यह एकजुटता आने वाले चुनावों के लिए पार्टी की सबसे बड़ी ताकत बन सकती है।
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