आंगनवाड़ी की कमी से बच्चों का बचपन प्रभावितनरेगल शहर के पुलिस थाने के सामने की गली स्थित आंगनवाड़ी की खस्ता हाल।

नरेगल में कई वार्डों में केंद्र नहीं

दूरी और असुरक्षित रास्तों से अभिभावक चिंतित

नरेगल (गदग). किसानों, मजदूरों और असंगठित क्षेत्र के श्रमिकों के बच्चों के लिए प्रारंभिक शिक्षा का आधार माने जाने वाले आंगनवाड़ी केंद्र नरेगल कस्बे में पर्याप्त संख्या में उपलब्ध नहीं हैं। कई वार्डों में जरूरत होने के बावजूद केंद्र संचालित नहीं हो रहे, जबकि कुछ स्थानों पर भवन होने के बाद भी उनका उपयोग नहीं किया जा रहा है। इससे बड़ी संख्या में बच्चे प्री-स्कूल शिक्षा से वंचित हो रहे हैं।

दूरी और खतरनाक रास्ते बने बाधा

कस्बे के वार्ड नंबर 3 के अंतर्गत आने वाले एन.एम. मल्लापुर, आश्रय कॉलोनी और बुलडोजर नगर के बच्चों को आंगनवाड़ी पहुंचने के लिए लगभग 3 किलोमीटर की दूरी तय करनी पड़ती है। रास्ते में पानी से भरी खदान और व्यस्त सडक़ होने के कारण अभिभावक बच्चों को भेजने से डरते हैं। परिणामस्वरूप पिछले 20 वर्षों से यहां के कई बच्चे आंगनवाड़ी से दूर हैं और निजी स्कूलों का सहारा ले रहे हैं।

इसी तरह वार्ड नंबर 8 के द्यांपुर क्षेत्र में भी स्थिति चिंताजनक है। यहां के बच्चों को 2 किलोमीटर दूर जाना पड़ता है, जहां रास्ते में नाला और श्मशान होने से अभिभावक असहज महसूस करते हैं।

योजनाओं का लाभ अधूरा

हालांकि आंगनवाड़ी कार्यकर्ता बच्चों, गर्भवती महिलाओं और जच्चाओं को पोषण आहार तथा विभिन्न सरकारी योजनाओं के तहत किट वितरित कर रहे हैं, लेकिन नियमित शिक्षा और देखभाल का लाभ नहीं मिल पा रहा है। स्थानीय लोगों का कहना है कि खाली पड़े सरकारी स्कूल भवनों का उपयोग कर नए केंद्र शुरू किए जा सकते हैं।

स्थान चयन और प्रबंधन पर सवाल

कई जगह नए आंगनवाड़ी भवन ऐसे स्थानों पर बनाए गए हैं, जहां तक पहुंचना कठिन है। इससे बच्चों की उपस्थिति कम हो गई है। वहीं कुछ पुराने भवन खाली पड़े हैं, जो अब गंदगी और असामाजिक गतिविधियों का अड्डा बनते जा रहे हैं।

स्थानीय लोगों ने आरोप लगाया कि कई कार्यकर्ता निर्धारित केंद्रों पर कार्य न कर अपनी सुविधा अनुसार स्थान बदल लेते हैं, जिससे संबंधित वार्ड के लोगों को योजनाओं की जानकारी और लाभ नहीं मिल पाता।

स्थानीय नागरिकों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने मांग की है कि वास्तविक जरूरत वाले क्षेत्रों की पहचान कर वहीं आंगनवाड़ी केंद्र स्थापित करने चाहिए।

सामाजिक कार्यकर्ता सोमप्पा हनमसागर ने सुझाव दिया कि सुविधाएं केवल सुविधाजनक स्थानों पर नहीं, बल्कि जरूरतमंद इलाकों में उपलब्ध करानी चाहिए।

कोई भी बच्चा प्रारंभिक शिक्षा से वंचित न रहे

मंगलवार को नरेगल क्षेत्र का दौरा कर स्थिति का निरीक्षण किया जाएगा। साथ ही, जहां भवन खाली पड़े हैं, उनका उपयोग अंगनवाड़ी केंद्रों के लिए किया जाएगा ताकि कोई भी बच्चा प्रारंभिक शिक्षा से वंचित न रहे।
शिवगंगम्मा, सीडीपीओ

जरूरत आधारित निर्माण पर जोर

अंगनवाड़ी केंद्रों का निर्माण केवल औपचारिकता के लिए नहीं, बल्कि वास्तविक आवश्यकता को ध्यान में रखकर किया जाएगा। इससे बच्चों और महिलाओं को अधिक लाभ मिलेगा और सरकारी अनुदान का सही उपयोग सुनिश्चित होगा।
मल्लेश पच्ची, मुख्य अधिकारी, नरेगल नगर पंचायत

बच्चों के समग्र विकास पर ध्यान जरूरी

बच्चों को केवल खाद्य किट वितरण तक सीमित नहीं रखा जाना चाहिए, बल्कि उनके समग्र विकास के लिए नियमित रूप से अंगनवाड़ी केंद्रों में लाने के प्रयास किए जाने चाहिए।
विनायक जरतारी, अध्यक्ष, कर्नाटक विकास वेदिके

स्थानीय स्तर पर व्यवस्थाओं में सुधार

कुछ केंद्रों के लिए वैकल्पिक व्यवस्थाएं की जा रही हैं। पुलिस थाने के सामने स्थित भवन को 122वें केंद्र के उपयोग में लाया जाएगा। वहीं, दूरी की समस्या होने पर बच्चों को भाग्यनगर स्थित अंगनवाड़ी केंद्र भेजने की व्यवस्था भी की जाएगी।
राधिका पवार, अंगनवाड़ी पर्यवेक्षक

 

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By Bharat Ki Awaz

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