शिक्षा सुधार की नई पहल
कर्नाटक में बढ़ते नशे पर सरकार सख्त
हर मेडिकल कॉलेज में खुलेंगे नशा मुक्ति केंद्र
बढ़ते ड्रग्स संकट पर बड़ा कदम
युवाओं में तेजी से फैल रही लत को रोकने की पहल
विशेषज्ञ बोले – स्कूल स्तर तक विस्तार जरूरी
हुब्बल्ली. राज्य में नाबालिगों और युवाओं में तेजी से बढ़ती मादक पदार्थों की लत को देखते हुए कर्नाटक सरकार ने सभी मेडिकल कॉलेजों में डी-एडिक्शन (नशा मुक्ति) सेंटर खोलने का निर्णय लिया है। इस पहल का उद्देश्य नशे के शिकार लोगों की पहचान कर उन्हें उपचार और पुनर्वास के जरिए सामान्य जीवन में वापस लाना है।
पहले चरण में 10 बेड की सुविधा
सरकारी योजना के तहत प्रत्येक मेडिकल कॉलेज में शुरुआती तौर पर 10 बेड आरक्षित किए जाएंगे। वर्तमान में लगभग 20 प्रतिशत कॉलेजों में यह सेवा शुरू हो चुकी है। मरीजों की संख्या के अनुसार भविष्य में क्षमता बढ़ाने की योजना है।
चौंकाने वाले आंकड़े
पुलिस आंकड़ों के अनुसार, राज्य में नशे की समस्या तेजी से बढ़ रही है। वर्ष 2023 में 6,767 मामले दर्ज हुए थे और 134 करोड़ रुपए के ड्रग्स जब्त किए गए थे। वहीं 2026 के सिर्फ दो महीनों में 2,378 मामले सामने आ चुके हैं और 35 करोड़ रुपए के मादक पदार्थ बरामद किए गए हैं। मामलों में 63 प्रतिशत तक की वृद्धि हुई है।
युवा सबसे अधिक प्रभावित
करीब 60 प्रतिशत नशा पीडि़त नाबालिग और युवा हैं। विशेषज्ञों के अनुसार, सिंथेटिक ड्रग्स का बढ़ता उपयोग, दोस्तों का दबाव और विलासी जीवनशैली का आकर्षण इसके प्रमुख कारण हैं। यह नेटवर्क अब ग्रामीण और अर्ध-शहरी क्षेत्रों तक फैल चुका है और छात्रों व प्रवासी मजदूरों को निशाना बना रहा है।
निम्हांस के मार्गदर्शन में इलाज
इन केंद्रों का संचालन राष्ट्रीय मानसिक स्वास्थ्य एवं तंत्रिका विज्ञान संस्थान (निम्हांस) के सहयोग से किया जाएगा। मनोचिकित्सक विशेषज्ञ यहां इलाज और काउंसलिंग की जिम्मेदारी संभालेंगे। कॉलेजों और हॉस्टलों में भी ड्रग्स सेवन की जांच शुरू कर दी गई है।
स्कूल स्तर पर भी हस्तक्षेप जरूरी
विशेषज्ञों का मानना है कि केवल मेडिकल कॉलेजों तक सीमित रहना पर्याप्त नहीं होगा। कई स्कूलों में भी बच्चों के नशे की चपेट में आने के मामले सामने आए हैं। ऐसे में स्कूलों में काउंसलिंग और नशा मुक्ति केंद्र शुरू करना समय की मांग बन गया है।
कॉलेजों में होगी नियमित जांच
राज्यभर के कॉलेजों और हॉस्टलों में ड्रग्स सेवन की जांच की जा रही है। यदि कोई छात्र नशे का सेवन करता पाया जाता है, तो उसे नजदीकी डी-एडिक्शन सेंटर में भेजकर उपचार और काउंसलिंग दी जाएगी।
केंद्रों का दायरा और प्रभाव दोनों बढ़ाए जाएंगे
राज्य के सभी मेडिकल कॉलेजों में डी-एडिक्शन सेंटर शुरू करने के निर्देश दिए गए हैं। कुछ स्थानों पर यह पहले ही प्रारंभ हो चुके हैं। हमारा उद्देश्य नशे की बढ़ती प्रवृत्ति पर नियंत्रण पाना और युवाओं को सही दिशा देना है। आने वाले समय में इन केंद्रों का दायरा और प्रभाव दोनों बढ़ाए जाएंगे।
–डॉ. बी.एल. सुजाता राठौड़, निदेशक, चिकित्सा शिक्षा निदेशालय
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