सरकारी अस्पतालों के आउटसोर्स कर्मचारियों की हालत खराब
245 से अधिक कर्मचारी प्रभावित
वेतन मांगने पर नौकरी जाने का डर
डीएचओ ने कहा – “एक माह में होगा भुगतान”
रायचूर. जिले में सरकारी अस्पतालों में कार्यरत आउटसोर्स कर्मचारियों को पिछले एक वर्ष से नियमित वेतन नहीं मिलने का गंभीर मामला सामने आया है। वेतन के अभाव में सैकड़ों कर्मचारियों के सामने परिवार चलाना मुश्किल हो गया है, जिससे वे आर्थिक और मानसिक संकट से गुजर रहे हैं।
जिला मुख्यालय सहित विभिन्न सरकारी अस्पतालों में लगभग 245 आउटसोर्स कर्मचारी कार्यरत हैं। इनमें सफाईकर्मी, ग्रुप-डी कर्मचारी, डाटा एंट्री ऑपरेटर, लैब टेक्नीशियन और फार्मासिस्ट शामिल हैं। आरोप है कि इनमें से अधिकांश कर्मचारियों को लंबे समय से वेतन नहीं मिला है या भुगतान अनियमित रहा है।
कर्मचारियों का कहना है कि वेतन न मिलने के बावजूद वे लगातार काम कर रहे हैं, लेकिन जब भी वे अपनी मांग उठाते हैं तो उन्हें नौकरी से निकालने की आशंका सताती है। कुछ कर्मचारियों ने प्रभावशाली लोगों के माध्यम से दबाव बनाकर वेतन दिलाने की कोशिश की, जबकि कई ने अधिकारियों से सीधे गुहार लगाई।
स्थिति की गंभीरता का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि कुछ दिन पहले एक कर्मचारी ने जिला स्वास्थ्य अधिकारी (डीएचओ) कार्यालय के सामने जहर खाकर आत्महत्या की चेतावनी दी थी। इसके बावजूद समस्या का स्थायी समाधान नहीं निकल पाया है।
जिला स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. सुरेंद्र बाबू ने कहा कि अधिकांश कर्मचारियों को वेतन दिया जा चुका है। कुछ मामलों में उपस्थिति में अंतर के कारण भुगतान में देरी हुई है। अब बजट प्राप्त हो गया है और शेष कर्मचारियों को एक महीने के भीतर वेतन जारी कर दिया जाएगा। जिनके पास ऑर्डर कॉपी नहीं है, उनकी समस्या भी जांचकर हल की जाएगी।
कर्मचारियों का आरोप है कि एजेंसियां बदलती रही हैं। पहले एआरसी, फिर मैसूर की स्विस एजेंसी और अब बल्लारी की पॉपुलर एजेंसी- लेकिन वेतन भुगतान की समस्या जस की तस बनी हुई है। एजेंसियां भुगतान पूरा होने का दावा करती हैं, जबकि अधिकारी बजट की कमी बताते हैं, जिससे कर्मचारियों में भ्रम की स्थिति है।
एक कर्मचारी ने नाम न प्रकाशित करने की शर्त पर कहा कि जो लोग आवाज उठाते हैं, उन्हें दो महीने का वेतन देकर चुप करा दिया जाता है। हमें समझ नहीं आता कि सच कौन बोल रहा है।
इस पूरे प्रकरण ने स्वास्थ्य विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर दिए हैं। विडंबना यह है कि दूसरों की जान बचाने वाले अस्पतालों में काम करने वाले कर्मचारी खुद अपने जीवन यापन के लिए संघर्ष कर रहे हैं। कर्मचारियों ने जल्द समाधान की मांग की है।
Breaking News सबसे पहले पाना चाहते हैं?
अभी हमारे WhatsApp Channel को join करें
हर खबर सबसे पहले
Join करें : https://whatsapp.com/channel/0029Vb7S2RA65yD9fZX4Og1Z

