ट्रैकिंग सेफ्टी नहीं सिर्फ टिकट बुकिंग तक सीमित
घटनाओं के बाद बढ़ी चिंता
सख्त एसओपी, ई-ट्रैकिंग और बीमा व्यवस्था लागू करने के निर्देश
हुब्बल्ली. राज्य के वन और पर्वतीय क्षेत्रों में ट्रैकिंग करने वालों की बढ़ती संख्या और हालिया हादसों के बीच वन विभाग की सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल उठने लगे हैं। ट्रैकिंग को नियंत्रित करने के लिए शुरू किया गया ‘अरण्य विहार’ ऑनलाइन पोर्टल फिलहाल केवल टिकट बुकिंग तक ही सीमित रह गया है, जबकि सुरक्षा के ठोस उपायों की कमी महसूस की जा रही है।
सुरक्षा पर उठे सवाल
हाल ही में ट्रैकिंग के दौरान केरल की युवतियों के लापता होने और एक की मौत की घटना ने इस मुद्दे को गंभीर बना दिया है। बावजूद इसके, वर्तमान प्रणाली में ट्रैकर्स की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए कोई स्पष्ट मानक संचालन प्रक्रिया (एसओपी) लागू नहीं की गई है।
सीमित दायरा
वन विभाग ने केवल 33 ट्रैकिंग स्थलों के लिए ही ऑनलाइन बुकिंग व्यवस्था उपलब्ध कराई है, जबकि कई लोकप्रिय और जोखिम भरे ट्रैकिंग स्थल अभी भी इसके दायरे से बाहर हैं। दूसरी ओर, सोशल मीडिया के जरिए बिना अनुमति और सुरक्षा मानकों के ट्रैकिंग आयोजन भी बढ़ रहे हैं।
मंत्री ने दिए सख्त निर्देश
वन मंत्री ईश्वर बी. खंड्रे ने इस स्थिति को गंभीरता से लेते हुए अधिकारियों को ट्रैकिंग के लिए सख्त एसओपी तैयार करने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने ट्रैकर्स की सुरक्षा के लिए नई तकनीकों के उपयोग पर जोर दिया है।
ई-ट्रैकिंग और बीमा पर जोर
मंत्री ने सुझाव दिया है कि ट्रैकिंग के दौरान मोबाइल में अस्थायी ‘ई-ट्रैकिंग’ ऐप अनिवार्य किया जाए, ताकि रास्ता भटकने की स्थिति में तुरंत लोकेशन का पता लगाया जा सके। साथ ही, ट्रैकर्स के लिए समूह बीमा, प्रशिक्षित गाइड और वायरलेस सिस्टम जैसी सुविधाएं भी लागू करने पर विचार किया जा रहा है।
जल्द लागू होंगे नए नियम
वन विभाग को निर्देश दिया गया है कि वह इन सभी बिंदुओं को शामिल करते हुए एक व्यापक और अनिवार्य सुरक्षा ढांचा तैयार करे, ताकि राज्य में ट्रैकिंग गतिविधियां सुरक्षित और व्यवस्थित तरीके से संचालित हो सकें।
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