कई दिग्गजों के बीच अंदरूनी टकराव
दावणगेरे उपचुनाव के बाद खुली गुटबाजी
जमीर बनाम सलीम-रिजवान खेमे में बढ़ी प्रतिस्पर्धा
हुब्बल्ली. कांग्रेस में मुस्लिम नेतृत्व को लेकर चल रही अंदरूनी खींचतान अब खुलकर सामने आ गई है। दावणगेरे दक्षिण उपचुनाव के बाद यह टकराव तेज हो गया है, जहां अलग-अलग गुट नेतृत्व के अवसर को लेकर सक्रिय नजर आ रहे हैं।
जमीर खेमे की मजबूत दावेदारी
राज्य के प्रभावशाली मंत्री जमीर अहमद खान को लंबे समय से मुस्लिम समुदाय का बड़ा चेहरा माना जाता है। वे सिद्धरामय्या के करीबी माने जाते हैं और समुदाय में उनकी अच्छी पकड़ भी रही है। हालांकि, उनके बढ़ते प्रभाव को लेकर पार्टी के भीतर ही असंतोष उभर रहा है।
उभरते चेहरे भी मैदान में
दूसरी ओर सलीम अहमद, रिजवान अरशद, एनए. हैरिस और तनवीर सेठ जैसे नेता भी समुदाय में अपनी पकड़ मजबूत करने की कोशिश में हैं। इन नेताओं को डीके. शिवकुमार के खेमे से जुड़ा माना जा रहा है।
टिकट विवाद से बढ़ी दरार
दावणगेरे उपचुनाव में अल्पसंख्यक उम्मीदवार को टिकट देने को लेकर मतभेद सामने आए। जमीर अहमद खान ने अब्दुल जब्बार के समर्थन में आवाज उठाई थी, लेकिन पार्टी ने एसएस. मल्लिकार्जुन के पुत्र को उम्मीदवार बनाया। इस फैसले से कुछ नेताओं में नाराजगी देखी गई।
प्रचार में दिखी दूरी
चुनाव प्रचार के दौरान जमीर अहमद खान की सीमित भागीदारी और अन्य नेताओं की सक्रियता ने गुटबाजी को और उजागर किया। हालांकि, एक दिन के प्रचार में उन्हें मिला भारी जनसमर्थन उनकी लोकप्रियता का संकेत रहा।
नेतृत्व की दौड़ निर्णायक मोड़ पर
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि कांग्रेस में मुस्लिम नेतृत्व को लेकर चल रही यह प्रतिस्पर्धा आने वाले समय में पार्टी की दिशा तय कर सकती है। दोनों गुट अपनी स्थिति मजबूत करने में जुटे हैं।
फिलहाल, यह ‘शीत युद्ध’ किस रूप लेगा, इस पर सभी की नजरें टिकी हुई हैं।
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