शिवमोग्गा. शिक्षण और रंगमंच—दोनों क्षेत्रों में प्रतिभा से ख्याति अर्जित करने वाली एक शिक्षिका को अदालत ने पति की हत्या के आरोप में मृत्युदंड सुनाया है। इस घटना ने शिक्षा और कला जगत को स्तब्ध कर दिया है।
शिक्षण और कला में प्रशंसा
कलबुर्गी जिले के कमलापुर तालुक के डोंगरगांव की प्राथमिक स्कूल में वर्ष 2008 के दौरान नियुक्त हुई लक्ष्मी ने अपनी अध्यापन शैली और पाठ्येतर गतिविधियों से छात्रों और सहकर्मियों का दिल जीत लिया था। बाद में शिवमोग्गा जिले में स्थानांतरण होने पर भी उन्होंने विद्यालय और सांस्कृतिक गतिविधियों में सराहनीय योगदान दिया।
रंगमंच पर उनके अभिनय और नृत्य ने उन्हें राज्य स्तरीय सर्वश्रेष्ठ नटी पुरस्कार तक दिलाया। 2024 में उन्हें दक्षिण भारत महिला साधिका पुरस्कार (एसआईडब्ल्यू) से भी सम्मानित किया गया था।
प्रेम प्रसंग और हत्या
लक्ष्मी ने वर्ष 2011 में इम्तियाज अहमद से विवाह किया था। इम्तियाज सोराब तालुक के तेलगुंद गांव में शिक्षक थे। बाद के वर्षों में वैवाहिक विवाद और अवैध संबंधों के कारण दरार गहराई। रमजान पर्व के अवसर पर विवाद इतना बढ़ा कि लक्ष्मी ने लोहे की पाइप से हमला कर पति की हत्या कर दी। शव को पड़ोसी कृष्णमूर्ति और शिवराज की मदद से पास के नाले में फेंका था। हत्या की सूचना स्वयं लक्ष्मी ने इम्तियाज के भाई को दी, जिसके बाद मामला भद्रावती थाने में दर्ज हुआ।
अदालत का फैसला
लंबी सुनवाई के बाद अदालत ने लक्ष्मी और कृष्णमूर्ति दोनों को फांसी की सजा सुनाई, जबकि शिवराज को 7 वर्ष की कैद की सजाई गई।
शिक्षा और कला जगत में सदमा
शिक्षा और संस्कृति के क्षेत्र में सक्रिय रही लक्ष्मी के खिलाफ यह फैसला सुनकर सहकर्मी और रंगकर्मी स्तब्ध और निराश हैं। एक ओर समाज सेवा और कला में योगदान, दूसरी ओर क्रूर हत्या का अपराध—इस विरोधाभासी जीवन ने सबको हिलाकर रख दिया है।
