मध्य पूर्व युद्ध से पर्यटन ठप, भारतीय कर्मचारियों में बढ़ी चिंता
दुबई, कतर, बहरीन में पर्यटकों की संख्या घटने की आशंका
वेतन कटौती और महंगाई से बढ़ी मुश्किलें
उडुपी. मध्य पूर्व में जारी युद्ध जैसे हालात का असर अब खाड़ी देशों के पर्यटन और आतिथ्य उद्योग पर साफ दिखाई देने लगा है। इसका सीधा प्रभाव दक्षिण कन्नड़ और उडुपी के हजारों भारतीय कर्मचारियों पर पड़ रहा है, जो इन क्षेत्रों में कार्यरत हैं।
पर्यटन सीजन पर संकट के बादल
नवंबर से अप्रेल तक दुबई, अबूधाबी, कतर और बहरीन में पर्यटन का पीक सीजन माना जाता है। लेकिन इस बार युद्ध के कारण पर्यटकों की संख्या में 11 से 27 प्रतिशत तक गिरावट की आशंका जताई जा रही है। पर्यटन एजेंसियों के अनुसार, इससे पूरे क्षेत्र को करोड़ों रुपए का नुकसान हो सकता है। वर्ष 2025 में करीब 100 मिलियन पर्यटक इन देशों में पहुंचे थे, जबकि इस वर्ष 13 प्रतिशत वृद्धि की उम्मीद थी।
वेतन कटौती की आशंका
हालांकि अभी तक कंपनियों ने आधिकारिक रूप से वेतन कटौती की घोषणा नहीं की है, लेकिन यदि हालात नहीं सुधरे तो अगले महीनों में 30 से 50 प्रतिशत तक सैलरी घटने की संभावना जताई जा रही है। बहरीन में कार्यरत उडुपी के एक कर्मचारी ने बताया कि ऐसी स्थिति में कोविड काल जैसी आर्थिक परेशानी फिर से सामने आ सकती है।
महंगाई और यात्रा खर्च में भारी बढ़ोतरी
युद्ध के कारण दैनिक उपयोग की वस्तुओं के दाम बढ़ गए हैं। वहीं भारत आने-जाने का खर्च भी कई गुना बढ़ गया है। पहले जहां 10-15 हजार रुपए में यात्रा संभव थी, अब वही खर्च एक लाख रुपए तक पहुंच गया है। सीधी उड़ानों की कमी से यात्रियों को लंबा रास्ता अपनाना पड़ रहा है।
होटल उद्योग पर गहरा असर
पर्यटकों की कमी के चलते होटल और आतिथ्य क्षेत्र का कारोबार बुरी तरह प्रभावित हुआ है। कई बुकिंग रद्द हो चुकी हैं, जिससे रोजगार पर संकट गहराने लगा है।
सायरन और अलर्ट से बढ़ा मानसिक तनाव
खाड़ी देशों में रह रहे भारतीयों ने बताया कि वे फिलहाल सुरक्षित हैं, लेकिन बार-बार बजने वाले सायरन और अलर्ट संदेश मानसिक तनाव पैदा कर रहे हैं। कुवैत में कार्यरत एक युवक ने बताया कि रात में सायरन सुनकर नींद टूट जाती है और दोबारा सोना मुश्किल हो जाता है।
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