बाहरी राज्यों से बढ़ी आवक, फिर भी ऊंचे दामों के कारण ग्राहकों की खरीदारी कम
दावणगेरे. जिले के विभिन्न बाजारों में इन दिनों आम की खुशबू छाई हुई है। अप्रेल के पहले सप्ताह से शुरू हुई आम की आवक अब तेजी पकड़ चुकी है, लेकिन ऊंची कीमतों के कारण बाजार में अपेक्षित रौनक नहीं दिख रही है।
कई राज्यों से पहुंच रहे आम
व्यापारियों के अनुसार, राज्य के कोलार, रामनगर, धारवाड़, कोप्पल जिलों के अलावा आंध्र प्रदेश और तमिलनाडु से भी बड़ी मात्रा में आम यहां के बाजारों में आ रहे हैं।
स्थानीय उत्पादन भी मौजूद
जिले के चन्नागिरी तालुक के संतेबेन्नूर क्षेत्र में भी बड़े पैमाने पर आम की खेती होती है। यहां खासतौर पर बादाम और तोतापुरी किस्मों की खेती की जाती है। इसके अलावा रसभरी (रसपुरी), मलाबार, बेनिशा, सिंधूर, मल्लिका, केसर सहित कई किस्में के.आर. मार्केट में उपलब्ध हैं।
कीमतें 100 रुपए से ऊपर
अधिकांश किस्मों के आम 100 रुपए प्रति किलो से अधिक कीमत पर बिक रहे हैं, जिससे ग्राहकों की खरीदारी प्रभावित हो रही है। बाजार में ग्राहक और व्यापारियों के बीच मोलभाव आम बात हो गई है।
गर्मी और महंगाई से प्रभावित व्यापार
के.आर. मार्केट के व्यापारी दादापीर का कहना है कि भीषण गर्मी के कारण लोग बाजार कम आ रहे हैं। सुबह-शाम थोड़ी बहुत बिक्री हो रही है, लेकिन आम के दाम सुनकर ग्राहक चौंक जाते हैं।
व्यापारी राचय्या स्वामी ने बताया कि अभी 15 दिनों से आम का कारोबार शुरू किया है, लेकिन बिक्री कम है। आने वाले दिनों में आवक बढ़ेगी तो दाम कम होंगे और व्यापार में तेजी आएगी।
15-20 दिन में राहत की उम्मीद
30 वर्षों से व्यापार कर रहीं मंगलम्मा का कहना है कि अभी अधिकतर आम बाहर से आ रहे हैं, लेकिन 15-20 दिनों में कीमतों में गिरावट आने की संभावना है, जिससे ग्राहकों की संख्या बढ़ेगी।
अन्य फलों के दाम भी ऊंचे
व्यापारी सिखंदर ने कहा कि आम के साथ-साथ अन्य फलों के दाम भी ऊंचे बने हुए हैं। रमजान के दौरान बढ़ी कीमतों में अभी तक गिरावट नहीं आई है। सेब और अनार जैसे फलों के दाम भी कम नहीं हुए हैं। बसव जयंती के बाद व्यापार में सुधार की उम्मीद है।
महंगाई और कम उत्पादन के चलते फिलहाल आम बाजार में सुगंध तो है, लेकिन खरीदारों की भीड़ अभी कम ही नजर आ रही है।
उत्पादन पर मौसम का असर
जिला बागवानी विभाग के संयुक्त निदेशक राघवेंद्र प्रसाद जीसी. ने बताया कि जिले में करीब 1,100 हेक्टेयर में आम की खेती होती है, लेकिन इस बार ओलावृष्टि और बारिश के कारण लगभग 40 प्रतिशत उत्पादन प्रभावित हुआ है।
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