आवास योजनाओं को चाहिए बजट का सहारा
अनुदान 3 लाख रुपए करने की मांग
कारवार (उत्तर कन्नड़). महंगाई आसमान छू रही है, लेकिन आवास योजनाओं की सहायता राशि वर्षों से जस की तस है। नतीजा—लाखों गरीब परिवार अपना घर बनाने में असमर्थ हैं। राज्य में बेघर लोगों की संख्या 37.48 लाख से अधिक हो चुकी है, वहीं 2019 से अतिवृष्टि और बाढ़ से तीन लाख से ज्यादा घर क्षतिग्रस्त हुए हैं।
ग्रामीण क्षेत्रों में राज्य सरकार की आवास योजना के तहत प्रति घर केवल 1.20 लाख रुपए का अनुदान मिलता है। पहले मनरेगा के तहत 90 मानव दिवस की मजदूरी (करीब 33,300 रुपए) भी मिलती थी, लेकिन नए नियमों से वह सहारा भी कम हो गया है। बढ़ती निर्माण लागत के बीच यह राशि किसी भी स्तर पर पर्याप्त नहीं मानी जा रही।
3 लाख रुपए अनुदान की मांग
आवेदकों का कहना है कि 1.20 लाख रुपए में मकान निर्माण का कोई भी चरण पूरा नहीं हो पाता। इसी कारण लाखों घर निर्माणाधीन अवस्था में अटके हैं। सहायता राशि को बढ़ाकर 3 लाख रुपए करने की मांग जोर पकड़ रही है।
नए लक्ष्य तय नहीं
2017 से 2023 के बीच आठ लाख लाभार्थियों को घर स्वीकृत हुए थे, लेकिन आर्थिक तंगी से कई निर्माण शुरू नहीं कर सके। ऐसे 7.38 लाख घरों को 2024-25 के लिए पुन: आवंटित किया गया। राज्य सरकार ने 2022-23 से 2024-25 तक नई लक्ष्य संख्या तय नहीं की है। पिछले वर्ष स्वीकृत 2.70 लाख घरों का निर्माण अब तक शुरू नहीं हुआ।
मत्स्याश्रय योजना की धीमी रफ्तार
मत्स्य विभाग की ‘मात्स्याश्रय’ योजना के तहत 10 हजार घर देने की घोषणा की गई थी। 2024-25 में 9 हजार सामान्य कोटा और 1 हजार विवेकाधीन कोटा तय हुआ, लेकिन दिसंबर 2025 तक 8914 घरों के आवंटन में से केवल 656 को मंजूरी मिली है, 1121 लंबित हैं।
केंद्र व राज्य से कितनी राशि जारी?
राज्य सरकार के अनुसार 2023-24 से अब तक 4362 लाभार्थियों को 26.56 करोड़ रुपए जारी किए गए हैं।
केंद्र की प्रधानमंत्री आवास योजना (ग्रामीण) के तहत 2.13 लाख लाभार्थियों को 800 करोड़ रुपए तथा पीएम-जनमन योजना के तहत 828 लाभार्थियों को 6.60 करोड़ रुपए जारी किए गए। कुल मिलाकर 2.18 लाख लोगों को 833.31 करोड़ रुपए वितरित किए गए हैं।
बढ़ती महंगाई और घटती सहायता के बीच आमजन का घर का सपना अधूरा न रह जाए—इसी उम्मीद के साथ सरकार से बजट में ठोस राहत की मांग की जा रही है।

