7.85 करोड़ रुपए की परियोजना से समुद्र में हादसों के दौरान मछुआरों को मिलेगी त्वरित राहत
मेंगलूरु. समुद्र में दुर्घटनाओं के दौरान मछुआरों को तुरंत राहत और चिकित्सकीय सहायता उपलब्ध कराने के लिए प्रस्तावित ‘सी एम्बुलेंस’ के मई महीने तक तटीय क्षेत्र में पहुंचने की उम्मीद है। कर्नाटक के तीनों तटीय मछलीपालन जिलों के लिए करीब 7.85 करोड़ रुपए की लागत से इस विशेष एम्बुलेंस नौका का निर्माण किया जा रहा है।
मत्स्य विभाग के अनुसार इस परियोजना के लिए कार्यादेश पहले ही जारी किया जा चुका है और तमिलनाडु की एक ठेका कंपनी इसके निर्माण में लगी हुई है। समुद्र में अक्सर दुर्घटनाओं के समय पास के मछुआरे ही बचाव कार्य में जुट जाते हैं, लेकिन पर्याप्त प्रशिक्षण और संसाधनों के अभाव में कई बार समय पर मदद नहीं पहुंच पाती और जानमाल का नुकसान हो जाता है। इसी कारण मछुआरा समुदाय लंबे समय से सी एम्बुलेंस की मांग कर रहा था।
पिछले दिसंबर में ठेकेदार को कार्यादेश दिया गया था और निर्माण पूरा करने के लिए छह महीने का समय निर्धारित किया गया है। यदि यह मई तक तैयार हो जाती है तो आगामी मानसून के दौरान पारंपरिक नावों से समुद्र में जाने वाले मछुआरों को इससे बड़ी राहत मिल सकती है। अगर मई में उपलब्ध नहीं हो पाई तो अगस्त तक इसे सेवा में उतारने का लक्ष्य रखा गया है।
यह आधुनिक सी एम्बुलेंस लगभग 23.5 मीटर लंबी और 6 मीटर चौड़ी होगी, जिसमें एक साथ पांच मरीजों को आपात चिकित्सा सुविधा दी जा सकेगी। इसमें ऑक्सीजन सिलेंडर, मॉनिटरिंग उपकरण, स्ट्रेचर समेत आवश्यक चिकित्सा सुविधाएं होंगी। इसके अलावा जीपीएस, रडार, नाइट विजन, सर्च-एंड-रेस्क्यू उपकरण और दो लाइफ-सेविंग नावें भी शामिल होंगी।
तटीय क्षेत्र के मध्य में तैनात किया जाएगा
मई तक सी एम्बुलेंस उपलब्ध कराने को कहा गया है। यदि इसमें देरी होती है तो अगस्त तक इसे सेवा में उतारने की योजना है। तीनों जिलों को सुविधा मिले, इसके लिए इसे तटीय क्षेत्र के मध्य में कहीं तैनात किया जाएगा।
–दिनेश कुमार कल्लेर, निदेशक, मत्स्य विभाग, बेंगलूरु।

