वैश्विक सैन्य बजट $2.887 ट्रिलियन; अमेरिका पहले, चीन दूसरे और भारत ने बढ़ाया रक्षा खर्च
नई दिल्ली: वैश्विक स्तर पर बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव और सुरक्षा चुनौतियों के बीच दुनिया भर के देश अपने रक्षा बजट में लगातार इजाफा कर रहे हैं। स्टॉकहोम अंतर्राष्ट्रीय शांति अनुसंधान संस्थान (SIPRI) की 2025 की ताजा रिपोर्ट के अनुसार, दुनिया का कुल सैन्य खर्च बढ़कर 2.887 ट्रिलियन डॉलर तक पहुंच गया है, जो पिछले वर्ष की तुलना में 2.9% अधिक है।
इस रिपोर्ट में भारत ने भी अपनी मजबूत उपस्थिति दर्ज कराते हुए वैश्विक सैन्य खर्च में 5वां स्थान हासिल किया है।
टॉप 5 देशों की सूची
SIPRI के आंकड़ों के अनुसार दुनिया के सबसे अधिक रक्षा खर्च करने वाले देश इस प्रकार हैं:
पहला स्थान: संयुक्त राज्य अमेरिका – 954 अरब डॉलर
दूसरा स्थान: चीन – 336 अरब डॉलर
तीसरा स्थान: रूस – 190 अरब डॉलर
चौथा स्थान: जर्मनी – 114 अरब डॉलर
पांचवां स्थान: भारत – 92.1 अरब डॉलर
गौरतलब है कि अमेरिका, चीन और रूस—इन तीन देशों का कुल सैन्य खर्च वैश्विक बजट का लगभग 51% हिस्सा है।
भारत का रक्षा खर्च क्यों बढ़ा?
भारत का सैन्य खर्च 2025 में बढ़कर 92.1 अरब डॉलर हो गया, जो 2024 की तुलना में 8.9% अधिक है। इसके पीछे कई अहम कारण हैं:
सीमा सुरक्षा चुनौतियां: विशेषकर पाकिस्तान और चीन के साथ बढ़ता तनाव
आधुनिकीकरण पर जोर: सेना को अत्याधुनिक हथियारों और तकनीक से लैस करना
भविष्य की तैयारी: संभावित युद्ध और सुरक्षा संकटों के लिए तैयारी
बजट में बड़ा निवेश
भारत सरकार ने 2026-27 के बजट में रक्षा क्षेत्र के लिए 7.85 लाख करोड़ रुपए आवंटित किए हैं। इसमें से लगभग 2.19 लाख करोड़ रुपए पूंजीगत खर्च के रूप में रखे गए हैं, जिनका उपयोग किया जाएगा:
लड़ाकू विमान और हेलिकॉप्टर
युद्धपोत और पनडुब्बियां
मिसाइल और स्मार्ट हथियार
ड्रोन और मानव रहित सिस्टम
यूरोप में भी तेज बढ़ोतरी
रिपोर्ट के अनुसार, वैश्विक सैन्य खर्च में बढ़ोतरी का एक बड़ा कारण यूरोप है, जहां खर्च 14% बढ़कर 864 अरब डॉलर हो गया। रूस-यूक्रेन युद्ध के चलते रूस और यूक्रेन दोनों ही देशों ने रक्षा बजट में भारी वृद्धि की है।
पाकिस्तान कहां खड़ा है?
भारत के मुकाबले पाकिस्तान का रक्षा बजट काफी कम है। पाकिस्तान का सैन्य खर्च 11.9 अरब डॉलर रहा, जिससे वह वैश्विक सूची में 31वें स्थान पर है।
तेजी से बदलते वैश्विक हालात में भारत का रक्षा बजट बढ़ाना केवल एक रणनीतिक कदम नहीं, बल्कि राष्ट्रीय सुरक्षा की अनिवार्यता बन चुका है। आधुनिक हथियारों और तकनीक में निवेश के जरिए भारत न केवल अपनी सीमाओं को मजबूत कर रहा है, बल्कि वैश्विक शक्ति संतुलन में भी अपनी भूमिका मजबूत कर रहा है।
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