बरसात के साथ बढ़ा भूस्खलन का खतराफाइल फोटो।

दहशत में तटीय क्षेत्र के लोग

दक्षिण कन्नड़ के कई संवेदनशील इलाकों में जान हथेली पर रखकर रह रहे लोग

प्रशासन ने शुरू की एहतियाती तैयारियां

पुत्तूर (मेंगलूरु). मानसून की शुरुआत के साथ ही दक्षिण कन्नड़ जिले के अनेक इलाकों में भू-स्खलन का खतरा फिर गहराने लगा है। पिछले कुछ वर्षों में लगातार सामने आई प्राकृतिक आपदाओं के कारण लोग भय के साए में जीवन बिताने को मजबूर हैं। जिले के सैकड़ों संवेदनशील स्थानों को चिन्हित कर प्रशासन ने सतर्कता बढ़ा दी है।

बीते हादसों की भयावह याद

वर्ष 2018 में कोडगु-दक्षिण कन्नड़ सीमा पर हुए भू-स्खलन और 2019 में बेल्तंगडी तालुक में आई बाढ़ एवं भूस्खलन ने भारी तबाही मचाई थी। इसके बाद कुक्के सुब्रह्मण्य, नेल्याडी, कुंब्रा, तेंकिला, बेल्लिप्पाडी और कोडिंबाडी सहित कई क्षेत्रों में बार-बार भू-स्खलन की घटनाएं सामने आती रहीं। इन घटनाओं ने अनेक परिवारों को संकट में डाल दिया है।

ग्राम पंचायतों को सौंपी जिम्मेदारी

जिला आपदा प्रबंधन प्राधिकरण ने जिलााधिकारी की अध्यक्षता में बैठक कर आवश्यक दिशा-निर्देश जारी किए हैं। एनडीआरएफ की टीम भी विभिन्न क्षेत्रों का दौरा कर स्थिति का आकलन कर रही है। प्रत्येक ग्राम पंचायत में आपदा प्रबंधन समिति गठित की गई है तथा विकास अधिकारियों को इंसिडेंट कमांडर बनाया गया है। संभावित खतरे वाले क्षेत्रों में चेतावनी बोर्ड लगाए जा रहे हैं तथा प्रत्येक तालुक में चार से छह राहत केंद्र स्थापित किए गए हैं।

मन्नुगुंडी और मित्ताबागिलु में कायम है खतरा

मेंगलूरु-बेंगलूरु राष्ट्रीय राजमार्ग-75 के नेल्याडी के समीप मन्नुगुंडी क्षेत्र में पहाड़ी धंसने का खतरा अब भी बरकरार है। पिछले वर्ष यहां कई बार यातायात बाधित हुआ था। वहीं बेल्तंगडी तालुक के मित्तबागिलु गांव के गणेशनगर क्षेत्र में करीब 30 परिवार हर वर्ष बारिश के दौरान विस्थापन की आशंका से जूझते हैं।

बेल्लिप्पाडी के लोग भी सहमे

पुत्तूर-उप्पिनंगडी मार्ग के बेल्लिप्पाडी और कोडिंबाडी गांवों में पिछले वर्ष हुए भू-स्खलन से आठ मकान क्षतिग्रस्त हुए थे। पहाडिय़ों की ढलानों पर बसे परिवार इस बार भी बारिश के मौसम में चिंता और भय के बीच दिन गुजार रहे हैं।

चेतावनी बोर्ड लगाए जा रहे हैं

प्राकृतिक आपदाओं पर एक साथ नजर रखने के लिए संबंधित अधिकारियों का व्हाट्सएप समूह बनाया गया है। संवेदनशील और पूर्व में प्रभावित क्षेत्रों में चेतावनी बोर्ड लगाए जा रहे हैं तथा वहां के निवासियों को नोटिस जारी किए जा रहे हैं।”
स्टेला वर्गीज, सहायक आयुक्त, पुत्तूर उपखंड

सात-आठ परिवार चिन्हित

कुक्के सुब्रह्मण्य मंदिर के समीप पहाड़ी तलहटी में रहने वाले सात-आठ परिवारों को खतरे वाले क्षेत्र के रूप में चिन्हित किया गया है। आवश्यकता पडऩे पर उन्हें मंदिर के अनंत और अभय आवासीयगृहों में आश्रय दिया जाएगा।
मल्लेश गौड़ा, विकास अधिकारी, सुब्रह्मण्य ग्राम पंचायत

अधिकारियों को मुख्यालय नहीं छोडऩे के निर्देश

आपदा प्रबंधन की बैठक में सभी अधिकारियों को मुख्यालय नहीं छोडऩे के निर्देश दिए गए हैं। जिन पहाडिय़ों के धंसने की आशंका है, वहां रहने वाले लोगों को किसी भी प्रकार की लापरवाही नहीं बरतनी चाहिए। ऐसे स्थानों की पहचान का कार्य जारी है।
अशोक राय, विधायक, पुत्तूर

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By Bharat Ki Awaz

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