30 खेतों में ऑटोमेटेड वेदर स्टेशन
मौसम की सटीक जानकारी से सिंचाई, दवा छिडक़ाव और फसल प्रबंधन में मिल रही मदद
बीदर। पारंपरिक कृषि पद्धति से स्मार्ट खेती की ओर बढ़ रहे किसानों के बीच अब ऑटोमेटेड वेदर स्टेशन (एडब्ल्यूएस) लोकप्रिय हो रहा है। मौसम में लगातार हो रहे बदलाव, अतिवृष्टि और अनावृष्टि से किसानों को होने वाले नुकसान को कम करने में यह तकनीक मददगार साबित हो रही है।
चालू वर्ष में अकेले बीदर जिले में 30 किसानों ने अपने खेतों में एडब्ल्यूएस स्थापित किया है, जो देश में सर्वाधिक संख्या बताई जा रही है। सेंसर आधारित यह स्वचालित प्रणाली वर्षा की संभावित मात्रा, हवा की गति, मिट्टी में नमी, पोषक तत्वों के प्रबंधन और फसलों में दवा छिडक़ाव से संबंधित जानकारी उपलब्ध कराती है। साथ ही कीट एवं रोगों के संभावित प्रकोप की पूर्व चेतावनी भी देती है।
बीदर बागवानी किसान उत्पादक कंपनी के अध्यक्ष चेतन दाबके ने बताया कि एडब्ल्यूएस से किसानों को मौसम के अनुसार खेती की योजना बनाने में सुविधा हो रही है। बारिश की मात्रा देखकर फसल और कटाई की योजना बनाई जा सकती है। हवा की गति के अनुसार दवा का छिडक़ाव किया जा सकता है। मिट्टी की नमी के आधार पर जरूरत के मुताबिक सिंचाई करने से पानी की अनावश्यक बर्बादी भी रोकी जा सकती है।
बागवानी विभाग के उपनिदेशक विश्वनाथ जी. के अनुसार, बीदर तालुक में 20, भालकी में 8 और औराद तालुक में दो स्थानों पर एडब्ल्यूएस लगाए गए हैं। एक प्रणाली की कीमत 42,500 रुपए है, जिस पर सरकार की ओर से 50 प्रतिशत सब्सिडी उपलब्ध है।
बीदर तालुक के कमठाण निवासी किसान वैजिनाथ निडोदा ने बताया कि एडब्ल्यूएस लगाने के बाद मौसम की जानकारी सीधे मोबाइल पर मिल रही है। पहले वे आवश्यकता से अधिक पानी देते थे, लेकिन अब फसल की जरूरत के अनुसार ही सिंचाई कर रहे हैं।
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