39 प्रतिशत कम बारिश से संकट
57 हजार हेक्टेयर धान में पानी का संकट
15 हजार हेक्टेयर बासमती की उपज आधी रहने की आशंका
बेलगावी। खेतों में जिस वक्त धान की बालियां दानों से भरने और बासमती की खुशबू फैलने का समय है, उसी वक्त बारिश की बेरुखी ने किसानों की उम्मीदों पर पानी फेर दिया है। जिले में मानसून की बारिश 39 प्रतिशत कम रहने से धान की फसल संकट में है। किसान इस बार उत्पादन में करीब 50 प्रतिशत तक गिरावट की आशंका जता रहे हैं।
जिले में करीब 57 हजार हेक्टेयर में धान बोया गया है, जिसमें लगभग 15 हजार हेक्टेयर बासमती है। बेलगावी बासमती और इंद्राणी जैसी किस्मों की कर्नाटक के साथ गोवा और महाराष्ट्र में भी मांग है। सामान्य मौसम में एक एकड़ से 20-25 क्विंटल या इससे अधिक उत्पादन होता है, लेकिन इस बार कई किसानों के लिए 10 क्विंटल भी मुश्किल बताया जा रहा है।
खेतों में पड़ी दरारें, पानी सूखा
यल्लूर, धामणे, वडगांव, सुळगे, हलगा, शाहपुर, बस्तवाड़, मजगांव, मच्छे, अनगोळ, देसूर, बसवनकुडची, निलजी, कडोली, देवगिरी और जाफरवाड़ी समेत खानापुर तालुक के कई इलाकों में धान की फसल पानी के अभाव में मुरझा रही है। करीब एक महीने से बारिश नहीं होने से खेतों में जमा पानी सूख गया है और कई जगह मिट्टी में दरारें पड़ गई हैं।
बोरवेल भी दे रहे जवाब
जुलाई में अच्छी बारिश के बाद मानसून अचानक कमजोर पड़ गया। बोरवेल के सहारे फसल बचाने की कोशिश कर रहे किसानों को भी भूजल स्तर नीचे जाने से पर्याप्त पानी नहीं मिल रहा। सिंचाई सुविधा वाले किसानों को भी उत्पादन में भारी कमी का डर है, जबकि पूरी तरह बारिश पर निर्भर किसानों की स्थिति और गंभीर है।
बासमती की उपलब्धता पर भी असर
बेलगावी की बासमती की मांग पड़ोसी राज्यों तक है। ऐसे में उत्पादन घटने का असर किसानों की आय के साथ स्थानीय बाजार में बासमती की उपलब्धता पर भी पड़ सकता है। अब किसानों की नजर आसमान पर टिकी है—बारिश हुई तो फसल बचने की उम्मीद, वरना सूखे खेत इस सीजन की बड़ी तस्वीर बन सकते हैं।
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